जगतसिंहपुर में पदस्थापित वन अधिकारी के यहां जांच
राष्ट्रीय खबर
भुवनेश्वर/जगतसिंहपुर: ओडिशा में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी अभियान के तहत विजिलेंस विभाग (सतर्कता विभाग) ने शनिवार को एक बड़ी सफलता हासिल की है। जगतसिंहपुर जिले के राहमा वन रेंज में तैनात फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (वन परिक्षेत्र अधिकारी) राजेंद्र कुमार सामंतराय के ठिकानों पर की गई छापेमारी में करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है।
विजिलेंस विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि सामंतराय ने अपनी सेवा के दौरान ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। इन सूचनाओं की पुष्टि होने के बाद, अदालत से वारंट लेकर विजिलेंस की विशेष टीमों ने एक साथ चार स्थानों पर धावा बोला।
आलीशान बंगले और कीमती जमीनों का खुलासा छापेमारी के दौरान विजिलेंस की टीम तब हैरान रह गई जब उन्होंने जगतसिंहपुर के चतारा इलाके में अधिकारी का 5500 वर्ग फुट में फैला एक भव्य तीन मंजिला आलीशान भवन देखा। इसके अलावा, सामंतरायपुर गांव में भी उनका 2500 वर्ग फुट का एक सुसज्जित दो मंजिला मकान पाया गया है। जमीन के दस्तावेजों की जांच में कटक और जगतसिंहपुर जैसे महत्वपूर्ण शहरों में पांच कीमती भूखंडों (प्लॉट) का पता चला है, जिनकी बाजार दर वर्तमान में करोड़ों में आंकी जा रही है।
नकद, सोना और भारी बैंक बैलेंस अचल संपत्ति के साथ-साथ अधिकारी के घर से भारी मात्रा में चल संपत्ति भी बरामद हुई है। सतर्कता विभाग के अनुसार, अब तक की गिनती में ₹3.69 लाख नकद और ₹80.68 लाख की बैंक जमा राशि (FD और बचत खाते) का विवरण मिला है। तलाशी के दौरान घर से लगभग 250 ग्राम सोने के आभूषण भी जब्त किए गए हैं। विलासिता के सामानों की बात करें तो ₹11 लाख मूल्य का घरेलू सामान, एक बोलेरो गाड़ी और दो दोपहिया वाहन भी अधिकारी की संपत्ति का हिस्सा पाए गए हैं।
चार दशकों की सेवा और भ्रष्टाचार का जाल राजेंद्र कुमार सामंतराय पिछले लगभग 40 वर्षों (चार दशक) से जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा जिलों के विभिन्न वन क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विजिलेंस अधिकारियों का मानना है कि इतनी लंबी अवधि तक एक ही क्षेत्र के आसपास जमे रहने के कारण उन्होंने भ्रष्टाचार का एक गहरा संजाल तैयार कर लिया था।
विभाग फिलहाल जब्त किए गए दस्तावेजों और संपत्तियों के तकनीकी मूल्यांकन में जुटा है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा बढ़ने पर उनकी कुछ और बेनामी संपत्तियों और निवेशों का खुलासा हो सकता है। इस कार्रवाई ने राज्य के वन विभाग और अन्य सरकारी महकमों में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है।