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बांधवगढ़ में अद्भुत पक्षी, सिर पर कलगी, शिकारी को दबोचने की कला है खास

उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैसे तो यहां के पर्यटक प्रेमी बाघों के लिए प्रसिद्ध है. अब यहां के हाथी भी यात्रियों को खूब लुभा रहे हैं, लेकिन यहां की अद्भुत जैव विविधता तरह-तरह के दूसरे वन्य प्राणी पक्षी भी पर्यटकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. यही वजह है कि अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है. अभी हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक अनोखा पक्षी देखने को मिला. जिसका रंग मौसम या उम्र के साथ बदलता रहता है. सिर पर खूबसूरत कलगी, पैनी निगाहें और फिर काफी फुर्ती के साथ शिकार को दबोचने की इसकी कला अद्भुत है.

बांधवगढ़ में दिखा कलगी वाला पक्षी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वैसे तो आपने बाघों के तरह-तरह के दिलचस्प वीडियो देखे हैं, लेकिन इस बार किसी पर्यटक ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से ही एक ऐसे पक्षी का वीडियो बनाया है. जो पर्यटकों को खूब भा रहा है. इस वीडियो को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन को एक पर्यटक ने उपलब्ध कराया है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. लोग वीडियो को देखकर इस पक्षी के बारे में और भी जानने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि ये अनोखा पक्षी, दिखने में ही चमत्कारी और अद्भुत नजर आता है.

सिर पर कलगी वाला ये कौन सा पक्षी ?

इस वीडियो में बहुत ही खूबसूरत दिखने वाला ये पक्षी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नजर आया है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय बताते हैं, की “वीडियो में दिख रहा ये पक्षी क्रेस्टेड हॉक ईगल है, जिसे हिंदी में शाहबाज के नाम से भी जाना जाता है. चेंजेबल हॉक ईगल के तौर पर भी इसकी पहचान है, इसका वैज्ञानिक नाम Nisaetus cirrhatus है. इस बाज की पहचान ही उसके सिर पर स्थित कलगी है. इसे भारतीय कलगीदार बाज या मोर्घर भी कहा जाता है, ये इसका प्रचलित नाम भी है.”

शिकारी पक्षी के तौर पर पहचान

क्रेस्टेड हॉक ईगल जिसे शाहबाज भी बोला जाता है, इसकी पैनी नजर और शिकार करने का तरीका ही इसे अलग करता है. ये यह पक्षी छोटे प्राणी जैसे कि चूहा, छिपकली, गिलहरी, खुले मैदान में पाए जाने वाले छोटे सरीसृप ऐसे जीवों का शिकार करता है. ये छोटे पक्षियों को दबोच कर शिकार करता है. सिर पर कलगी इस शिकारी पक्षी की खास पहचान है.

कहां पाया जाता है और क्यों विशेष ?

ये शिकारी पक्षी घने वनों में रहने वाला है. ये मध्य भारत, दक्षिणी भारत समेत भारत के पूर्वी वनों में पाया जाता है. इसके अलावा दक्षिण पूर्व एशिया, भारत, श्रीलंका, और अंडमान द्वीप समूह में भी पाया जाता है. क्रेस्टेड हॉक ईगल भारत के फेमस पक्षियों में से एक है. ये पक्षी काफी ऊंचाई पर उड़ने में माहिर है और उड़ान के समय पंख फड़फड़ाए बिना ही हवा की धाराओं में बहने की काबिलियत रखता है.

ये पक्षी घने जंगल के किनारे और बड़े-बड़े पार्कों में अक्सर मिल जाता है. शिकार करते समय ये अपनी पैनी नजर और पंजों का इस्तेमाल करता है. ये भारतीय महाद्वीप का स्थाई पक्षी है.

बांधवगढ़ क्यों आता है रास ?

इसे पक्षी का बांधवगढ़ एक बहुत ही पसंदीदा जगह में से एक है. इसकी वजह यह है कि बांधवगढ़ के घने जंगल, बड़े-बड़े पेड़ों वाले वन, इस शिकारी पक्षी के लिए बहुत ही मुफीद जगह है. ये टाइगर रिजर्व इस पक्षी के लिए आवास बनाने के लिए बेहतर जगह उपलब्ध कराता है. साथ ही घास के बड़े-बड़े मैदान और खुले जंगल के इलाके इसके लिए बहुत ही कारगर है, क्योंकि इसे शिकार करने में भी आसानी होती है.

खाद्य श्रृंखला में अहम रोल

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पाए जाने वाले इस पक्षी को बहुत ही विशेष माना जाता है, क्योंकि ये एक शिकारी पक्षी है और जंगल में पाए जाने वाले छोटे-छोटे जो जीव होते हैं, उनको खाता है और उनका शिकार करता है. उनको कंट्रोल भी करता है. ये शिकारी पक्षी खाद्य श्रृंखला के लिए बहुत ही अहम कार्य निभाता है और इसीलिए ही इसे बड़ा यूनिक पक्षी माना जाता है.

बाज और गिद्ध में क्या होता है फर्क ?

क्रेस्टेड हॉक ईगल एक बाज है, ऐसे में एक बाज और गिद्ध के बीच आखिर फर्क क्या होता है. तो उसे लेकर एक्सपर्ट बताते हैं की बाज अपने पोषण के लिए खुद शिकार करता है, जबकि गिद्ध जो है मरे हुए प्राणी का मांस खाता है. गिद्ध की तुलना में बाज आकार में छोटा होता है, लेकिन इसे शिकार करके खाना ही पसंद होता है.