Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Amravati News: 108 लड़कियों से दरिंदगी और 350 वीडियो वायरल; जानें अमरावती 'वीडियो कांड' में कैसे बिछ... MP Crime News: झाबुआ में अमानवीयता की सारी हदें पार, महिला का मुंडन कर कंधे पर पति को बैठाकर गांव मे... Cyber Crime News: 'आपका नंबर पहलगाम आतंकी के पास है...' कॉल पर डराकर बुजुर्ग से 73 लाख की ठगी, जानें... Bihar New CM: बिहार में रचा गया इतिहास, सम्राट चौधरी बने पहले BJP मुख्यमंत्री; विजय चौधरी और विजेंद्... Bengal Election 2026: पांच संभाग और BJP का 'साइलेंट मिशन', चुनावी शोर के बीच ऐसे बंगाल फतह की रणनीति... Punjab J&K Dispute: पंजाब और जम्मू-कश्मीर में फिर तकरार, जानें क्या है 1979 का वो समझौता जिसका जिक्र... Punjab News: पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में भीषण सड़क हादसा, श्रद्धालुओं से भरी बस पलटने से 6 की मौत, 25... MP Board 10th, 12th Result 2026: आज सुबह 11 बजे जारी होंगे मध्य प्रदेश बोर्ड के नतीजे, यहाँ देखें Di... ED Raid on AAP MP: आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की रेड, पंजाब से गुरुग्राम त... Chirag Paswan visits Pashupati Paras: अस्पताल में चाचा पशुपति पारस से मिले चिराग पासवान, पैर छूकर लि...

ऑस्ट्रेलिया की संसद में बुर्के को लेकर विवाद

चेहरा ढंकने के सवाल पर बढ़ गये हैं देश के सांसद

कैनबेराः ऑस्ट्रेलिया की संसद में बुर्का और चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब ऑस्ट्रेलिया की दक्षिणपंथी सीनेटर पॉलिन हैन्सन  ने सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं सोमवार को पूरी तरह से बुर्का पहनकर संसद में प्रवेश किया। सीनेटर हैन्सन का यह कदम एक प्रतीकात्मक विरोध था, जिसका उद्देश्य इस बात पर जोर देना था कि सार्वजनिक जीवन में चेहरे को ढकना सुरक्षा और सामाजिक सामंजस्य के लिए खतरा पैदा करता है।

जैसे ही उन्होंने संसद के भीतर बुर्का पहनकर कदम रखा, राजनीतिक गलियारों में हंगामा मच गया। कई सांसदों ने उनके इस कृत्य को विवादास्पद और भड़काऊ बताया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी के रूप में देखा। सीनेटर हैन्सन की पार्टी, वन नेशन, लंबे समय से इस तरह के प्रतिबंधों की मांग कर रही है, उनका तर्क है कि सुरक्षा कारणों से लोगों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह कदम इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देता है और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, खासकर मुस्लिम महिलाओं के उन अधिकारों का जो अपनी आस्था के तहत ऐसा परिधान पहनना पसंद करती हैं। स्पीकर को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने संसदीय नियमों की समीक्षा करने का आश्वासन दिया। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के जटिल संतुलन पर एक महत्वपूर्ण बहस को फिर से शुरू करती है।

इस मुद्दे ने पूरे देश में एक व्यापक चर्चा छेड़ दी है, जिसमें नागरिक अधिकार समूह, धार्मिक नेता और आम जनता सभी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। सरकार को अब एक ऐसा रास्ता खोजना होगा जो सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करे और साथ ही सुरक्षा चिंताओं को भी संबोधित करे। सीनेटर हैन्सन का यह कृत्य निश्चित रूप से ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में एक ध्रुवीकरणकारी क्षण बन गया है, जो देश के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने पर दबाव डाल रहा है।