हमास और इजरायल के बीच सीमित युद्धविराम पर तनाव
तेल अवीवः गाजा पट्टी में जारी संघर्ष एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है, क्योंकि हमास और इजराइल के बीच सीमित युद्धविराम और बंधकों की अदला-बदली को लेकर बातचीत चल रही है। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और मध्यस्थ देशों के प्रयासों के बावजूद, स्थायी शांति की राह अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के माध्यम से हमास ने इजराइली सेना को कुछ मृत बंधकों के अवशेष सौंपे हैं। यह कदम संघर्ष को कम करने की दिशा में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, हालांकि इजराइल अभी भी सभी जीवित बंधकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग पर अडिग है। दूसरी ओर, हमास अपनी मांगों पर कायम है, जिसमें इजराइली जेलों में बंद फलस्तीनी कैदियों की बड़ी संख्या में रिहाई शामिल है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय एजेंसियों ने गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बिजली, पानी, भोजन और चिकित्सा आपूर्ति की कमी ने लाखों लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम को स्थायी बनाने और गाजा में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुँच सुनिश्चित करने के लिए इजराइल पर दबाव डाल रहा है।
विदेश मंत्रियों की बैठकें और आपातकालीन शिखर सम्मेलन लगातार हो रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच गहरा अविश्वास किसी भी दीर्घकालिक समाधान की राह में बड़ी बाधा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्तियों के हितों का टकराव भी बन गया है, जिससे इसका समाधान और भी जटिल हो गया है।
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मामले पर कई बार मतदान हुआ, लेकिन किसी भी प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित करना मुश्किल रहा है। संघर्ष की भयावहता को देखते हुए, स्थायी शांति स्थापित करने के लिए एक व्यापक कूटनीतिक प्रयास और एक समावेशी शांति प्रक्रिया की तत्काल आवश्यकता है। इसके अभाव में, यह क्षेत्र लंबे समय तक अस्थिरता का शिकार बना रह सकता है।