मूसी नदी में उफान का असर हैदराबाद के लोगों पर
राष्ट्रीय खबर
हैदराबादः तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में, मूसी नदी के जलस्तर में अचानक और अत्यधिक वृद्धि ने नदी के किनारे बसे कई रिहायशी इलाकों में तनाव और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। बहादुरपुरा विधानसभा क्षेत्र के असदबाबानगर, किशनबाग, महमूदनगर और चादरघाट के शंकर नगर, मूसानगर तथा रसूलपुरा जैसे क्षेत्रों के निवासी इन दिनों एक असामान्य खतरे का सामना कर रहे हैं: उनके घरों और गलियों के आस-पास सांप, नेवले, बिच्छू और अन्य सरीसृपों का दिखना।
यह स्थिति उस्मानसागर और हिमायतसागर जैसे प्रमुख जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का सीधा परिणाम है। भारी वर्षा के कारण इन दोनों जलाशयों को अपनी क्षमता बनाए रखने के लिए मजबूरन अपने द्वार खोलने पड़े, जिससे मूसी नदी में पानी का बड़ा प्रवाह आया और वह पूरी तरह से लबालब भर गई। नदी में आए इस भीषण उफान ने उन सभी प्राकृतिक आवासों को जलमग्न कर दिया, जिनमें ये सरीसृप आमतौर पर रहते थे।
अपना आश्रय खो देने के कारण, ये जीव सुरक्षित और सूखे ठिकाने की तलाश में नदी के किनारों की ओर भागने को मजबूर हो गए। जब उन्हें नदी के किनारे भी उपयुक्त आश्रय नहीं मिला, तो उन्होंने पास की आवासीय कॉलोनियों और घरों की ओर रुख किया, जिससे निवासियों में घबराहट फैल गई। ये जीव अब लोगों के रिहायशी इलाकों में घूमते देखे जा रहे हैं।
असदबाबानगर के एक निवासी, शकील ने इस अप्रत्याशित संकट पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, हमने अपने इलाके में पहली बार एक नेवला देखा। इसे देखकर निवासी तुरंत डर गए और हमने बिना किसी देरी के स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी। उनका बयान इस बात की पुष्टि करता है कि सरीसृपों का इस तरह रिहायशी इलाकों में आना एक असामान्य घटना है, जिसने स्थानीय सुरक्षा और शांति को भंग कर दिया है।
यह ध्यान देने योग्य है कि मूसी नदी साँपों की कई प्रजातियों और अन्य सरीसृपों के लिए एक प्राकृतिक पर्यावास रही है। मगरमच्छों का दिखना भी इस नदी में कोई नई बात नहीं है, खासकर उफान के समय। नंदी मुसलाई गुड़ा के एक स्थानीय निवासी, निज़ाम, ने इस बात पर प्रकाश डालते हुए बताया, मूसी नदी में हमें अक्सर मगरमच्छ दिखाई देते हैं। अतीत में, उन्होंने नदी किनारे चरने वाले मवेशियों पर हमला भी किया है। हालाँकि, उन्होंने एक राहत की बात भी बताई कि सौभाग्य से, उन्होंने अभी तक नदी किनारे खेलने वाले किसी भी बच्चे पर हमला नहीं किया है।
वर्तमान में, स्थानीय निवासियों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है, और प्रशासन से इस अप्रत्याशित वन्यजीव घुसपैठ को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया जा रहा है। नदी में आया यह उफान केवल जल संकट नहीं, बल्कि एक मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति भी पैदा कर रहा है।