रात तक स्थिति के और बिगड़ने की पूर्व चेतावनी जारी
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सभी बैराजों से छोड़ा जा रहा है पानी
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खतरे के निशान को पहले पार कर गया
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कई और बस्तियों को खाली कराया जाएगा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः आगरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब हथिनीकुंड और गोकुल बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया। हथिनीकुंड से ढाई लाख क्यूसेक और गोकुल बैराज से 1.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है और यह 498.3 फीट तक पहुँच गया है, जो चेतावनी बिंदु से 3.3 फीट अधिक है। अधिकारियों का मानना है कि शनिवार तक यह 499 फीट के बाढ़ स्तर को भी पार कर सकता है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
इस खतरे को देखते हुए, जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। सदर तहसील के ठार आश्रम के मेहरा नाहरगंज गाँव से लगभग 40 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है, तो पाँच हजार से अधिक परिवार प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें नगला बूढ़ी, अमर विहार दयालबाग, मोतीमहल, कटरा वजीर खां और रामबाग बस्ती जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
बाढ़ का असर सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है। आगरा शहर के 40 से ज़्यादा नाले उफान पर हैं, जिससे जल निकासी की समस्या पैदा हो गई है। इसका मुख्य कारण यमुना के जलस्तर में वृद्धि और नालों में टैपिंग के कारण पानी का पीछे की ओर लौटना है। दयालबाग के निचले इलाकों और बल्केश्वर व टेढ़ी बगिया में पानी घुसना शुरू हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
यमुना के बढ़ते जलस्तर ने आगरा के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर भी अपना असर दिखाया है। कैलाश घाट पर स्थित कैलाश मंदिर की सीढ़ियाँ पूरी तरह से डूब गई हैं, जबकि बल्केश्वर घाट पर स्थित काली मंदिर पूरी तरह से पानी में समा गया है। सबसे बड़ी चिंता का विषय ताजमहल है, जो कि यमुना के ठीक किनारे पर स्थित है। ताजमहल के पीछे स्थित चंद्रशेखर पार्क और दशहरा घाट भी पानी में डूब गए हैं। हालांकि ताजमहल के मुख्य ढाँचे को कोई खतरा नहीं है, लेकिन अधिकारी इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
इस विकट परिस्थिति में, प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। सिंचाई विभाग और नगर निगम की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों में जुटी हैं। यमुना का यह रौद्र रूप लोगों के मन में डर पैदा कर रहा है और आने वाले समय में स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन और लोगों को मिलकर काम करने की जरूरत है।