वैज्ञानिकों ने क्वांटम इंटरनेट की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है
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क्वांटम तकनीक और इसकी चुनौतियाँ
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एर्बियम: क्वांटम नेटवर्क की कुंजी
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एचजेडडीआर की भूमिका और भविष्य
राष्ट्रीय खबर
रांचीः क्वांटम इंटरनेट की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक बड़ा कदम उठाया है। इस नई पहल में डेनमार्क और जर्मनी के शोधकर्ता मिलकर काम कर रहे हैं। उनका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा क्वांटम नेटवर्क बनाना है जो भविष्य की सुरक्षित संचार और शक्तिशाली कंप्यूटिंग ज़रूरतों को पूरा कर सके। यह क्वांटम नेटवर्क दुर्लभ-पृथ्वी तत्व एर्बियम पर आधारित होगा। इस प्रोजेक्ट का नाम इक्वल है और इसे डेनमार्क के इनोवेशन फंड से करीब 40 मिलियन डेनिश क्राउन (लगभग 5.3 मिलियन यूरो) का फंड मिला है। यह प्रोजेक्ट मई 2025 में शुरू हुआ है और अगले पाँच साल तक चलेगा।
क्वांटम तकनीक हमें अटूट एन्क्रिप्शन और बिल्कुल नए तरह के कंप्यूटर बनाने में मदद करती है। उम्मीद है कि भविष्य में ये कंप्यूटर ऑप्टिकल क्वांटम नेटवर्क के ज़रिए आपस में जुड़ेंगे। हालांकि, इस सपने को पूरा करने के लिए हमें ऐसे क्वांटम प्रकाश स्रोतों की ज़रूरत है जो अभी मौजूद नहीं हैं। इक्वल प्रोजेक्ट का मकसद इन्हीं ज़रूरतों को पूरा करना है। डेनमार्क के टेक्निकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट समन्वयक सोरेन स्टोबे का कहना है कि यह एक मुश्किल काम है, लेकिन उनकी टीम बहुत मज़बूत है। उनका सबसे कठिन लक्ष्य क्वांटम प्रकाश स्रोतों को क्वांटम मेमोरी के साथ जोड़ना है। कुछ साल पहले तक यह नामुमकिन लगता था, लेकिन अब उन्हें इस दिशा में एक रास्ता दिख रहा है।
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इस प्रोजेक्ट में डीटीयू की नैनोफोटोनिक चिप्स को खास तकनीकों के साथ जोड़ा जाएगा, जिनमें सामग्री, नैनोइलेक्ट्रोमैकेनिक्स, नैनोलिथोग्राफी और क्वांटम सिस्टम शामिल हैं। आज कई तरह के क्वांटम प्रकाश स्रोत उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें या तो क्वांटम मेमोरी के साथ काम करने की क्षमता नहीं है, या वे ऑप्टिकल फाइबर के साथ संगत नहीं हैं।
इन सभी चुनौतियों के बीच, एर्बियम ही एकमात्र व्यवहार्य विकल्प के रूप में उभरा है। हालांकि, एर्बियम की एक बड़ी कमी यह है कि यह प्रकाश के साथ बहुत कमज़ोर तरीके से संपर्क करता है। इस संपर्क को काफी बढ़ाना ज़रूरी है, और डीटीयू में विकसित नई नैनोफोटोनिक तकनीक से यह अब संभव हो गया है। इस परियोजना के लिए केवल उन्नत नैनोफोटोनिक्स ही नहीं, बल्कि क्वांटम तकनीक, बहुत कम बिजली की खपत वाली एकीकृत फोटोनिक्स और नई नैनोफैब्रिकेशन विधियों की भी ज़रूरत है। इन सभी क्षेत्रों में बहुत ज़्यादा संभावनाएं हैं।
हेल्महोल्ट्ज़-ज़ेंट्रम ड्रेसडेन-रोसेंडॉर्फ (एचजेडडीआर) इस प्रोजेक्ट में सिलिकॉन का उपयोग करके क्वांटम प्रकाश के नए स्रोत विकसित करने में मदद करेगा। सिलिकॉन वही सामग्री है जो हमारे रोज़मर्रा के इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होती है। ये प्रकाश स्रोत फाइबर-ऑप्टिक संचार में उपयोग की जाने वाली तरंगदैर्ध्य पर काम करेंगे, जिससे वे सुरक्षित संचार और शक्तिशाली कंप्यूटिंग जैसी भविष्य की क्वांटम तकनीकों के लिए आदर्श बन जाएंगे।
एचजेडडीआर में आयन बीम भौतिकी और सामग्री अनुसंधान संस्थान के परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. योंडर बेरेंसन बताते हैं, “हम उन्नत आयन बीम तकनीकों का उपयोग करके एर्बियम परमाणुओं को छोटी सिलिकॉन संरचनाओं में प्रत्यारोपित करेंगे। हम यह भी अध्ययन करेंगे कि अल्ट्रा-शुद्ध सिलिकॉन का उपयोग करके उनके प्रदर्शन को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।” यह शोध उन क्वांटम उपकरणों के निर्माण की नींव रखेगा जिन्हें आज की तकनीक में आसानी से जोड़ा जा सकेगा। यह परियोजना क्वांटम इंटरनेट के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।