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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले से बदला आर्थिक समीकरण

यूरोपीय संघ में और मुद्रास्फीति की चिंता

बर्लिनः यूरोपीय संघ (ईयू) में नई आर्थिक नीतियां और बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताएं इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और उच्च उपभोक्ता मांग ने पूरे संघ में मुद्रास्फीति को उच्च स्तर पर धकेल दिया है।

यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि की है, लेकिन इसके बावजूद कई सदस्य देशों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक लगातार बढ़ रहा है। ईयू आयोग ने सदस्य देशों से राजकोषीय विवेक बनाए रखने और सार्वजनिक ऋण को कम करने का आग्रह किया है।

साथ ही, वे हरित ऊर्जा में निवेश और डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि संघ की अर्थव्यवस्था को भविष्य के झटकों से बचाया जा सके। जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे बड़े सदस्य देश इस आर्थिक चुनौती का सामना करने के लिए विभिन्न उपायों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें नागरिकों को बढ़ती लागत से राहत देने के लिए सब्सिडी और कर में कटौती शामिल है।

हालांकि, इन उपायों से सरकारी बजट पर दबाव पड़ने की भी संभावना है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि मुद्रास्फीति को तुरंत नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह यूरोपीय संघ में आर्थिक मंदी का कारण बन सकती है। इसके अलावा, श्रम बाजार में चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं, क्योंकि कई क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की कमी है। यूरोपीय संघ के नेताओं को अब एक नाजुक संतुलन बनाना होगा: मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और सामाजिक स्थिरता बनाए रखना।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा पदभार ग्रहण करने के बाद अपने देश की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए नये टैरिफ का एलान कर पूरे विश्व के आर्थिक समीकरण को बिगाड़ दिया है। अपने देश के हित की बात रखते हुए ट्रंप ने सभी देशों द्वारा लगाये जाने वाले शुल्क के बराबर ही शुल्क लगाने का एलान किया है। इसी वजह से आयात निर्यात का आनुपातिक संबंध बिगड़ गया है।