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भारत में जीनोम संपादित चावल की दो किस्में विकसित

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने एक कार्यक्रम में किसानों को जानकारी दी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कल नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम में भारत में दो जीनोम-संपादित चावल किस्मों के विकास की घोषणा की। यह वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक नई शुरुआत है।

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक और किसान शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के विकसित राष्ट्र के सपने को साकार किया जा रहा है और किसान समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। आज की उपलब्धि स्वर्ण अक्षरों में लिखी जाएगी। आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने का आह्वान किया था।

उनके शब्दों से प्रेरित होकर आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने इन नई किस्मों के निर्माण के साथ कृषि के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने आगे कहा कि इन नई फसलों के विकास से न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

इससे सिंचाई के पानी की बचत होगी और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरणीय दबाव कम होगा। यह दोनों लाभ – उत्पादन में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण – प्राप्त करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। श्री चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले समय में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, पौष्टिक उत्पादन बढ़ाने और भारत तथा विश्व दोनों को भोजन उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, साथ ही भारत को विश्व का खाद्य भंडार बनाने की भी आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, हमें गर्व है कि हमारे प्रयासों से प्रतिवर्ष 48,000 करोड़ मूल्य के बासमती चावल का निर्यात हो रहा है। मंत्री ने सोयाबीन, अरहर, तुअर, मसूर, उड़द, तिलहन और दलहनों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए और कदम उठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। श्री चौहान ने माइनस 5 और प्लस 10 फार्मूला भी पेश किया, जिसमें बताया गया कि इसमें चावल की खेती के क्षेत्र को 5 मिलियन हेक्टेयर कम करना और उसी क्षेत्र में चावल का उत्पादन 10 मिलियन टन बढ़ाना शामिल है। इससे दलहन और तिलहन की खेती के लिए जगह खाली हो जाएगी।