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खून की जांच की आंच से झूलस रहे हैं स्वास्थ्य मंत्री

भाजपा सांसद की पैरवी से घिरा है पूरा कारोबार

  • बहती गंगा में कौन कौन हाथ धो रहा है

  • रघुवर दास के शासन काल का फैसला जारी

  • सामान्य से अधिक कीमत पर हो रहा भुगतान

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः रिम्स के निदेशक वनाम स्वास्थ्य मंत्री के विवाद की परतें धीरे धीरे खुलने लगी है। कई ऐसे तथ्य सामने आये हैं, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी अपनी पार्टी और महागठबंधन को छोड़कर झारखंड भाजपा के एक कद्दावर राज्यसभा सांसद की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना क्यों चाहते हैं।

विवाद में यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेजी तौर पर सभी कुछ देख समझ लेने के बाद भी रिम्स की जांच संबंधी टेंडर की जांच का आदेश स्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय से जारी किया गया था। सूत्र बताते हैं कि जब टेंडर फाइनल होना था, उसी दिन इस जांच का आदेश रिम्स को भेजा गया और इस काम में एनएचएम के कुछ अधिकारी भी आगे बढ़कर सक्रिय रहे।

लिहाजा यह माना जा सकता है कि जिस काम को रोकने के लिए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के कंधे पर रखकर गोली दागी गयी है, उसका असली मजा दूसरे उठा रहे हैं। खून की जांच के इस धंधे में किन किन लोगों ने बहती गंगा में हाथ धोने का काम किया है, वह भी धीरे धीरे उजागर होता जा रहा है।

मामले की जड़ में रिम्स में एक सेंट्रल लैब की स्थापना का है। दस्तावेज बता रहे हैं कि पिछले तीन वर्षों से यह टेंडर किसी न किसी बहाने रोका जाता रहा है और इसका सीधा लाभ किसे मिलता रहा है, यह समझना आसान है। यह बताना जरूरी है कि रिम्स की स्थिति को आगे ले जाने की अनुशंसा करने वाली राष्ट्रीय टीमों ने कई बार ऐसे जांच की प्रक्रिया रिम्स के अधीन करने की हिदायत दी थी।

(जारी)