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पहलगाम में भूतहा शहर जैसा नजारा

पूरे शहर के लोग अब भी शोक और दहशत में

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः पहलगाम दरअसल खास तौर पर हनीमून मनाने वालों और छुट्टी मनाने वाले यात्रियों के बीच पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट था। इस शहर में बुधवार को भूतहा शहर जैसा नजारा रहा। बैसरन हमले के महज 24 घंटे में करीब 20,000 होटलों के 90 फीसदी से ज्यादा कमरे खाली हो गए, जिसमें 26 नागरिक मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।

मंगलवार सुबह तक ज्यादातर होटल फुल थे और स्थानीय टूर ऑपरेटर पूरे दिन पूछताछ में व्यस्त रहे। पहलगाम होटल एंड ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जावेद बुर्जा ने बताया, हमें अब रद्दीकरण के लिए कॉल आ रहे हैं। हम संभावित मेहमानों को कुछ समय इंतजार करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि ज्यादातर तुरंत रद्दीकरण पर जोर देते हैं।

पहलगाम की अर्थव्यवस्था, जिसमें कोई अन्य उद्योग नहीं है, पर्यटन पर निर्भर उन्होंने कहा, कश्मीर में पर्यटन का मौसम खत्म हो चुका है। श्री बुर्जा ने कहा कि पिछले तीन सालों में कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, खासकर पहलगाम में, जिसके कारण स्थानीय लोगों ने नए होटलों और भोजनालयों में अतिरिक्त निवेश किया है।

श्री बुर्जा ने कहा, पहलगाम हमले का कश्मीर पर्यटन पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। यह हमला अमानवीय और अत्यधिक निंदनीय है। टैक्सी मालिकों, होटल व्यवसायियों और टट्टू संचालकों के कई संगठनों द्वारा जारी बंद के आह्वान के मद्देनजर बुधवार को पहलगाम में अधिकांश भोजनालय बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हमलावरों के खिलाफ नारे लगाए।

एक टैक्सी चालक ने कहा, पर्यटक पहलगाम की जीवन रेखा हैं। पहलगाम की शांतिपूर्ण जगह होने की छवि धूमिल हुई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहलगाम से पर्यटकों को सुरक्षित रास्ता मुहैया कराया। किसी भी पर्यटक को पहलगाम में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। डीएसपी रैंक के पुलिस अधिकारी वासु अग्रवाल ने कहा, पर्यटकों में दहशत थी। हमने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया। बुधवार को 200 से ज़्यादा वाहनों से पर्यटकों को पहलगाम से बाहर निकाला गया।

कुछ इसी तरह कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भी हाल है, जहां से पर्यटक आनन फानन में लौट गये हैं। इन तमाम स्थानों के कारोबार का मुख्य आधार पर्यटन ही था। अब तो जिनलोगों ने विभिन्न माध्यमों से एडवांस बुकिंग कराया था, वे भी बुकिंग कैंसिल कर रहे हैं। ऐसे में पर्यटन के शीर्ष मौसम में पूरे कश्मीर की अर्थव्यवस्था का क्या होगा, यह बड़ा सवाल यहां के लोगों को परेशान कर रहा है।