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केंद्र ने तीन लाख गांवों का भूमि सर्वेक्षण ड्रोन से

देश की एक बड़ी परेशानी दूर करने में विज्ञान की मदद

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्र सरकार ने 3 लाख गांवों में 67,000 वर्ग किलोमीटर भूमि का सर्वेक्षण करने के लिए ड्रोन का उपयोग किया पंचायती राज विभाग ने कहा कि केंद्र सरकार ने ₹132 लाख करोड़ मूल्य की 67,000 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण भूमि का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दस राज्यों में फैले 65 लाख भूमि मालिकों को संपत्ति कार्ड वितरित करने से एक दिन पहले दी गई।

पंचायती राज विभाग ने अपने स्वामित्व कार्यक्रम के तहत पांच सेंटीमीटर तक की सटीकता वाले ड्रोन का उपयोग करके सर्वेक्षण शुरू किया। अब तक 92 फीसद ड्रोन मैपिंग पूरी हो चुकी है, जिसमें लगभग 3.17 लाख गांव शामिल हैं। विभाग ने कहा कि योजना का लक्ष्य 3.44 लाख से अधिक गांवों को कवर करना है, जिसे 2026 तक पूरा किए जाने की संभावना है।

अब तक 31 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना में शामिल हो चुके हैं। इनमें से सिक्किम, तेलंगाना और तमिलनाडु ने केवल पायलट चरण में भाग लिया। तेलंगाना और बिहार की राज्य सरकारों के पास इस योजना का अपना संस्करण है। इस ड्रोन भूमि सर्वेक्षण से काम तेज हो गया है और इस काम में लगने वाला मानव श्रम और समय की भी कमी हो रही है। यह योजना अप्रैल 2020 में शुरू की गई थी और श्री मोदी द्वारा अक्टूबर 2020 में संपत्ति कार्ड का पहला दौर वितरित किया गया था।

ग्रामीण संपत्तियों का सर्वेक्षण करने का उद्देश्य भूमि मालिकों को अपनी भूमि के टुकड़ों का मुद्रीकरण करने में मदद करना है। यदि भूमि मालिक ऋण के लिए आवेदन करते हैं तो संपत्ति कार्ड बैंकों में स्वीकार्य होंगे।

इससे लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों को सुलझाने और पंचायतों के पास उपलब्ध भूमि की मात्रा पर स्पष्टता प्रदान करने की भी उम्मीद है, जिसका उपयोग पट्टे पर देकर धन जुटाने या सामुदायिक हॉल और पंचायत भवन जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जा सकता है। प्रधानमंत्री को मूल रूप से 26 दिसंबर को कार्ड वितरित करने थे, लेकिन पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की मृत्यु के मद्देनजर राष्ट्रीय शोक के हिस्से के रूप में कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था।