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झारखंड के चुनाव का दूसरा दौर जबर्दस्त होगा

बयानों और विज्ञापनों से बहुत कुछ साफ होता जा रहा है

  • भाजपा का जोर अखबार और गूगल पर

  • कांग्रेस को यूट्यूब और फेसबुक का आसरा

  • आम मतदाता दोनों को तौलता जा रहा है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रांची एसपी की एक कार्रवाई पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा बिफर गये। उन्होंने साफ साफ कहा कि अमित शाह जहां ठहरे हुए थे, वहां की तलाशी लेने वाले अधिकारी पर चुनाव के बाद कार्रवाई की जाएगी। इस एक बयान से ही साफ हो जाता है कि झारखंड के विधानसभा चुनाव को लेकर असम के सीएम कितने तनाव में है।

उन्हें ही इस बार झारखंड के चुनाव का सहप्रभारी बनाया गया है। झारखंड चुनाव के प्रभारी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाकर आदिवासियों को अपने तरफ लाने की पुरजोर कोशिश का शायद अपेक्षित लाभ नहीं मिला है। पहले चरण के आदिवासी बहुमत वाले इलाकों में हुए मतदान से तो यही संकेत मिलता है जबकि कई सीटें इसके अपवाद में भी है।

अब विज्ञापन की बात करें तो भाजपा के विज्ञापन जिस तरीके से प्रकाशित हो रहे हैं, उसके ठीक उलट और काफी देर से कांग्रेस का विज्ञापन यूट्यूब और फेसबुक पेजों पर आ रहा है। भाजपा ने इस बार चंद अखबारों के साथ साथ गूगल पर विज्ञापन देने की तरकीब अपनायी है। झारखंड के किसी भी हिस्से से किसी भी वेबसाइट को गूगल के जरिए खोलने पर भाजपा का विज्ञापन छा रहा है।

हर सीट पर अनेक महत्वपूर्ण नेताओं की जनसभा के जरिए भी भाजपा ने मतदाताओं को अपने पाले में करने का प्रयास किया है। दूसरी तरफ कांग्रेस के विज्ञापन यूट्यूब के उन चैनलों पर नजर आ रहे हैं, जो आम तौर पर मोदी सरकार की आलोचना करने वाले रहे हैं। इन विज्ञापनों में अपनी सरकार बनने की स्थिति में जनता को क्या लाभ होगा, यह बताया जा रहा है।

मजेदार बात यह है कि आम जनता इन दोनों किस्म के प्रचार और चुनाव अभियान का औसत निकालने में जुटी है। वह अखबार पढ़ रही है जबकि मोबाइल के जरिए सोशल मीडिया में भी सूचनाओं पर नजर डाल रही है। वैसे इसके बीच ही असली सच क्या है, यह जनता जमीनी हकीकत से तौल रही है।

लिहाजा यह चुनाव भाजपा और इंडिया गठबंधन के लिए कांटे की टक्कर बनता दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे पर होने की वजह से यह तय है कि अब सारा दारोमदार हिमंता बिस्वा सरमा पर है, जिन्होंने अपने प्रचलित तरीकों से कमसे कम भाजपा संगठन के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सक्रिय करने में सफलता पायी है। दूसरी तरफ स्थानीय आदिवासियों के बीच की सोच को जो नेता सोच समझ पा रहे हैं, उनकी बात को फिलहाल नहीं सुना जा रहा है।

दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन का चुनाव का हाल अधिक उत्साहवर्धक नहीं है। तीन प्रमुख दलों का वोट ट्रांसफर उतना नहीं हो रहा है जो चुनावी जीत के लिए अपेक्षित है। सभी दल अपने अपने समर्थकों के भरोसे हैं तो उनके सहयोगी दलों के कार्यकर्ता समर्थन देने की औपचारिकता भर पूरी कर रहे हैं। कुल मिलाकर दूसरे चरण के मतदान के पहले यह स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। लिहाजा दूसरे चरण की हर एक सीट पर जीत दर्ज करना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है।