Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
शब्दों का मायाजाल नहीं स्पष्टता चाहिए Sehore to Prayagraj: सीहोर से प्रयागराज जाना हुआ आसान, ट्रेन के इस स्टॉपेज से अस्थि विसर्जन के लिए म... Bastar Pandum: आदिवासी प्रदर्शनी देख मंत्रमुग्ध हुए अमित शाह, बस्तर पंडुम के विजेताओं को किया सम्मान... Kanpur Lamborghini Case: शिवम मिश्रा नहीं तो फिर कौन था स्टीयरिंग पर? आरोपी के वकील के दावे से केस म... Delhi Health News: जीबी पंत अस्पताल में नई सुविधाएं; विशेष सीटी स्कैनर, कैथ लैब और न्यूरो ICU का हुआ... Mohan Bhagwat meets Adnan Sami: मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात पर सियासी बवाल, कांग्रेस ने बताय... Baba Siddique Murder Case: आरोपी आकाशदीप करज सिंह को बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली जमानत, बड़ी राहत Sharad Pawar Health Update: शरद पवार की तबीयत बिगड़ी, सांस लेने में तकलीफ के बाद पुणे के अस्पताल में... Bihar Governance: बिहार के सामान्य प्रशासन विभाग को मिला ISO सर्टिफिकेट, सीएम नीतीश कुमार की प्रशासन... नीतीश कुमार की फिसली जुबान? राबड़ी देवी को देख बोले- 'ई जो लड़की है...', बिहार विधान परिषद में हाई व...

अंतरिम जमानत का कहर झेलती भाजपा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देकर, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने उस घटनाक्रम को उलट दिया है जिसने मौजूदा आम चुनाव के लिए समान अवसर को बिगाड़ दिया है। जब श्री केजरीवाल को दिल्ली के लिए शराब नीति के निर्माण में भ्रष्टाचार में कथित संलिप्तता के लिए मार्च में गिरफ्तार किया गया था, तो यह संघवाद और लोकतंत्र के लिए एक स्पष्ट झटका नहीं लगा होगा।

लेकिन जब चुनाव प्रक्रिया पहले से ही चल रही थी, तब एक मौजूदा मुख्यमंत्री और विपक्ष के एक प्रमुख व्यक्ति की गिरफ्तारी से क्षेत्रीय दलों में सदमे की लहर दौड़ गई। और, जैसे ही वह सलाखों के पीछे रहे, इससे यह आशंका पैदा हो गई कि केंद्र में सत्ता में मौजूद पार्टियों के अलावा अन्य दलों द्वारा संचालित राज्यों को आसानी से केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मुख्यमंत्रियों को उन आरोपों पर गिरफ्तार करने के लिए मजबूर किया जा सकता है जो सबूतों पर आधारित हो भी सकते हैं और नहीं भी।

श्री केजरीवाल के मामले में, अदालत आम चुनाव को एक जून तक अंतरिम जमानत देने के लिए पर्याप्त कारण के रूप में सही है, जब अंतिम चरण का मतदान होगा, और केंद्र के तर्क को खारिज कर दिया कि यह राशि होगी राजनेताओं के प्रति अनुकूल व्यवहार। जैसा कि न्यायालय ने बताया है, अंतरिम रिहाई आदेश संबंधित व्यक्ति और आसपास की परिस्थितियों से जुड़ी विशिष्टताओं से संबंधित हैं। प्रचार क्षेत्र से किसी उल्लेखनीय नेता की अनुपस्थिति, खासकर जब उसे अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है, एक ऐसा कारक होगा जो चुनाव की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति पर संदेह पैदा करेगा।

लेकिन अदालत का यह एक विशेष फैसला भाजपा के लिए सरदर्द बन गया। पहली प्रेस कांफ्रेंस में श्री केजरीवाल ने ऐसी बातें कह दी, जिससे अमित शाह को छोड़ भाजपा का कोई नेता सामना करने तक से तैयार नहीं हुआ। शीर्ष अदालत ने कुछ शर्तों पर जमानत दी है और उन्हें अपने कथन का पालन करना होगा। वैसे इन अदालती बंदिशों का कोई अर्थ भी नहीं था क्योंकि वह भी चुनाव प्रचार के लिए ही जमानत मांग रहे थे और आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान सरकारी काम काज लगभग नहीं के बराबर होते हैं।

तिहाड़ जेल से बाहर आने का दृश्य आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला था। अगले दिन कनाट प्लेट के हनुमान मंदिर में पूजा कर भाजपा से उन्होंने एक और अवसर छीन लिया। अब प्रेस कांफ्रेंस में केजरीवाल ने ऐसी बातें कह दी, जिनका पूरा खंडन भाजपा की तरफ से आना कठिन है।

लालकृष्ण आडवाणी से लेकर रमण सिंह तक को किनारे लगाने की बात का कोई खंडन नहीं है। इसके बीच ही अनेक भाजपा नेताओं के नाम है, जो वाकई दरकिनार किये गये हैं। दूसरी तरफ भाजपा की सारी सत्ता दो लोगों के बीच केंद्रित होने की वजह से दूसरे नेता ऐसी बातों पर बयान देने का साहस भी नहीं कर पाते हैं। केंद्रीय नेतृत्व में नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह बचे हैं जो अपनी पहचान बनाये रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसके बीच ही योगी आदित्यनाथ को भी अगले दो महीनों में हटा देने की बात कहकर केजरीवाल ने यूपी भाजपा की राजनीति में नये सिरे से भूचाल पैदा कर दिया है।

यह सभी जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ खुद इस पद के लिए मोदी और शाह की जोड़ी की पहली पसंद नहीं थे। बगावती तेवर की वजह से मजबूरी में उन्हें यूपी का सीएम बनाना पड़ा था। अब केजरीवाल ने जो सवाल खड़े किये हैं, उसके सिर्फ एक हिस्से का खंडन अमित शाह के द्वारा किया गया है कि श्री मोदी तीसरी बार पूरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री बने रहेंगे। बाकी आरोपों पर खुद अमित शाह भी सफाई देने की स्थिति में नहीं है। कुल मिलाकर शीर्ष अदालत द्वारा केजरीवाल को अंतरिम जमानत देना फिलहाल भाजपा के गले की हड्डी बन गया है।

वह ऐसे ऐसे मुद्दों पर भाजपा को घेर रहे हैं, जिनका संतोषजनक उत्तर दे पाना किसी दूसरे नेता के बूते के बाहर की बात है। ऐसी स्थिति में भाजपा के अंदर सुलगी आग को भड़काने का काम वह कर गये हैं। इसका असर अगर उत्तरप्रदेश में हुआ तो भाजपा के लिए तीन सौ सीट जीतने का लक्ष्य भी और दूर चला जाएगा।

वैसे केजरीवाल की चाल तो दिल्ली और पंजाब में अपनी ताकत और मजबूत करने के साथ साथ हरियाणा में भी पैर जमाना है। गुजरात में चुनाव प्रचार का अब कोई फायदा नहीं है पर यूपी में आम आदमी पार्टी का संगठन पनप रहे है। ऐसे में केजरीवाल यहां की जमीन पर पार्टी की मजबूती कितनी है, उसे भी आजमा सकते हैं। दरअसल शिक्षा और स्वास्थ्य की उपलब्धियां कुछ ऐसी है, जो बार बार भाजपा को निरुत्तर कर देती है। जमानत भी जी का जंजाल बन गया है।