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उपायुक्त विजया जाधव का एक वर्ष का सराहनीय कार्यकाल

  • आदिम जनजातियों के कल्याण पर खास ध्यान

  • साकची बाजार अतिक्रमण का मुद्दा भी सुलझाया

  • सोमवारी सबर को गोद लेकर पढ़ाना शुरू किया

पार्थो चक्रवर्ती

जमशेदपुरः अपने कर्मों से बड़े होने वाले लोगों के लिए प्रायः शायर की यह पंक्ति लिखी जाती है और ऐसा ही कुछ रुतबा शहर की उपायुक्त विजया जाधव का है, जिन्होने अपने एक साल के कार्यकाल में अब तक वो कुछ किया है, जिसके लिए अलग अलग लोगों व पदाधिकारियों का नाम अलग अलग समय पर लिया जाता रहा।

पदभार के ग्रहण करने पर प्रशासनिक साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा और वर्षों से कार्यालय में जमे पड़े मठाधीशों को काम करने के लिए अलग अलग जगह भेज दिया। ताकि बिना किसी भेदभाव के लोग आ जा सके, वरना कार्यालय में उन्ही की पहुंच बन रही थी, जिनकी पहुंच थी।

इसी क्रम में सबसे पिछड़े व आदिम जनजातियों का दर्द इन्होने समझा और उन स्थानों पर पहुंची जहां सबर जनजाति निवास करती थी और अपने पहुंचने के साथ ही आदिम जनजाति को मिलने वाली सुविधा एवं अन्य सभी सरकारी लाभ को दिलवाने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशासन को सक्रिय कर आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बिरसा आवास योजना एवं अन्य सभी से योग्य लाभुकों को जोड़ने की पहल की।

पिछले दो दशक से साकची बाजार अतिक्रमण को लेकर लगातार अखाड़ा बनता रहा है और आधी अधूरी पहल कर हर कोई इसे बीच में छोड़ जाता, ऐसे में उपायुक्त विजया जाधव में स्ट्रेट माईल रोड को वनवे कराने में सफलता पाई तथा बाजार में वाहनों के बतरतीब आवाजाही को नियंत्रित किया। जिला में रामनवमी व दुर्गापूजा, ईद, जुलूसे मोहम्मदी जैसे संवेदनशील पर्व त्योहार पर प्रशासन के साथ दिन रात की सक्रियता दिखायी।

महिला होने के कारण महिला सुलभ ममत्व की छाया भी उपायुक्त में उस समय दिखी जब उन्होने सोमवारी सबर नाम की एक बच्ची को गोद लिया। ये वो बच्ची थी, जिसके माता-पिता का देहान्त हो गया था। इस बच्ची के प्रति उपायुक्त का ममत्व ऐसा कि उन्होने बच्ची का नामांकन नेताजी सुभाष आवासीय विद्यालय, गोलमुरी में करवाया।

अब लगभग हर पर्व त्योहार वे उस बच्ची के साथ होती हैं और उनपर अपना ममत्व लुटाती हैं। इसी क्रम में उनके सामने टुना सबर के स्वास्थ्य की समस्या आयी जो कि मरणासन्न हालत में था। उसे सदर अस्पताल में भर्ती करवाया। उन्होने अपनी निगरानी रखते हुए उसे ठीक करवाया।

अपने पूर्व के कार्यों से मशहूर प्रशासनिक सेवा की इस अधिकारी ने जिला में अवैध खनन माफियाओं को भी अपना विकराल रूप दिखाया, जब कपकपाती ठंड में रात 12 से भोर पांच बजे तक हाईवे पर निगरानी करते हुए अवैध गिट्टी व बालू खनन कर ले जाने वाले ट्रक व हाईवा को खुद पकड़ा।

उन्होंने जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में झोला छाप डाक्टरों पर भी नकेल कसा, जिस क्रम में पटमदा के अवैध डाक्टर (झोलाछाप) इन्द्रनील चौधरी के क्लीनीक में औंचक छापामारी की, जहां से उन्होने कई दस्तावेज बरामद किया, जिससे पता चला कि यह व्यक्ति बिना किसी डिग्री के अपने नाम पर डॉक्टर लिखते हुए अवैध गर्भपात एवं अन्य अवैध गतिविधियों को संचालन करता था।

कुल मिलाकर कहा जाए तो प्रशासनिक सेवा की जिस छवि के लिए विजया जाधव को जाना जाता रहा, उसी के अनुरूप उन्होने पूर्वी सिंहभूम जिले में अपने वर्तमान कार्यकाल का एक वर्ष पूरा किया।

उनकी छवि इस रूप में आ गयी है कि मैडम को जो सही लगेगा वही करेगी। काम की तीव्रता कुछ इस प्रकार है कि वर्तमान समय में लगभग सभी सरकारी कार्यालय अपडेट मोड में है, कोई भी काम पेंडिंग नजर नहीं आता। अपने ऐसे उपायुक्त पर शहरवासियों को नाज है।