Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Shivpuri News: शिवपुरी में तालाब में डूबने से दो चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत; गांव में पसरा मातम West Bengal Politics: लोकसभा स्पीकर से मिलेंगे टीएमसी के बागी सांसद; क्या भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ... Sattu Paratha Recipe: शेफ कुणाल कपूर स्टाइल सत्तू का पराठा और चोखा; घर पर बनाएं ढाबा जैसा स्वाद Somvati Amavasya 2026: अधिकमास की सोमवती अमावस्या आज; जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और दान का महत्व AC Buying Guide 2026: इन्वर्टर AC लेना फायदेमंद है या नॉन-इन्वर्टर? बिजली बिल कम करने का सही तरीका Crude Oil Price Drop: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 4% सस्ता, क्या पेट्रोल-डीजल के घटेंगे दाम? US-Iran Deal: अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म करने के लिए बनी प्रारंभिक सहमति; ईरान को मिल सकती है 300 अरब ड... Veer Pahariya Upcoming Movie: 'बेनाम' से वापसी करेंगे वीर पहाड़िया; महेश भट्ट की फिल्म में निभाएंगे ... Vidarbha Pro T20 League Final: पगारिया स्ट्राइकर्स बनी चैंपियन; आखिरी ओवर में संस्कार चावटे का कमाल West Bengal Politics: लोकसभा स्पीकर से मिलेंगे टीएमसी के बागी सांसद; क्या भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ...

Political Earthquake in Bengal: तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने किया NCPI में विलय; जानिए इस पार्टी का इतिहास और नेतृत्व

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में एक ऐसा नाम सुर्खियों में है, जिसे शायद ही किसी ने पहले कभी सुना हो—‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI)। महज 822 वोटों के साथ त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपनी चुनावी पारी शुरू करने वाली यह अनजान पार्टी, आज तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के विलय के बाद दिल्ली की राजनीति का केंद्र बन गई है।

🗳️ त्रिपुरा से चुनावी डेब्यू: एक गुमनाम शुरुआत

NCPI का रजिस्ट्रेशन पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन उसने अपना राजनीतिक सफर त्रिपुरा से शुरू किया। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने आदिवासी समुदायों की आवाज उठाने का दावा किया था, लेकिन उसे कोई खास सफलता नहीं मिली। पार्टी के कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए और जो मैदान में उतरे, उन्हें 1,000 से भी कम वोट मिले। चुनाव के बाद पार्टी की सक्रियता लगभग समाप्त हो गई थी।

💰 पार्टी का ढांचा और संदिग्ध वित्तीय स्थिति

चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, पार्टी को कुल 1.13 लाख रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था। पार्टी की कोषाध्यक्ष शेवली कुंडू हैं, जो हावड़ा स्थित कुछ निजी संस्थाओं की डायरेक्टर भी हैं। पार्टी अध्यक्ष उत्तिया कुंडू के नेतृत्व में संचालित यह पार्टी लंबे समय से संसाधनों की कमी और आंतरिक विवादों से जूझ रही थी। पार्टी के पूर्व उम्मीदवारों ने भी स्वीकार किया कि चुनाव के बाद नेतृत्व से उनका संपर्क टूट गया था।

🚀 विलय के बाद राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री

तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों द्वारा NCPI में विलय की घोषणा ने इसे रातों-रात ‘क्षेत्रीय पार्टी’ से ‘राष्ट्रीय चर्चा’ का विषय बना दिया है। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग की है। टीएमसी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने इस विलय की पुष्टि की है। यह घटनाक्रम न केवल टीएमसी के आंतरिक संकट को दर्शाता है, बल्कि एक छोटी सी पार्टी को अचानक से एक बड़े राजनीतिक मंच में तब्दील कर दिया है।

⚖️ भविष्य की राह और कानूनी चुनौतियां

राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए यह विलय कौतूहल का विषय है। जहां एक ओर बागी सांसद इसे अपनी नई राजनीतिक पहचान मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर NCPI का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड और उसकी कार्यप्रणाली कई सवाल खड़े करती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह अनजान पार्टी वाकई पश्चिम बंगाल की राजनीति को कोई नई दिशा दे पाएगी या यह केवल सत्ता के संघर्ष का एक कानूनी दांव भर है।