Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
झारखंड CGL परीक्षा रद्द होने पर भारी बवाल: प्रोजेक्ट भवन में जबरन घुसे सफल अभ्यर्थी, फफक कर रोए बर्ख... भारी बारिश के बीच निकली मां मनसा की विसर्जन यात्रा, कंधों पर प्रतिमाएं लेकर चले श्रद्धालु बोकारो के कुमार मंगलम स्टेडियम में दूसरी NTPC राष्ट्रीय रैंकिंग तीरंदाजी प्रतियोगिता का भव्य आगाज कैचमेंट एरिया में भारी बारिश के बाद पतरातू डैम के 4 फाटक खोले गए, नदियों में बढ़ा जलस्तर त्रुटिरहित मतदाता सूची बनाने पर जोर: पाकुड़ में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं से किया सीधा सं... पलामू और गढ़वा में खनिज संपदा का होगा महासर्वे: GSI की रिपोर्ट से तय होगी गुणवत्ता, औद्योगिक विकास क... धमतरी में चाकू की नोक पर सोने का लॉकेट लूटने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार, बाइक और चाकू बरामद रायपुर में ₹5000 के उधार विवाद में युवक की चाकू मारकर हत्या: रेलवे ट्रैक पर फेंका शव, 2 नाबालिग समेत... इलाज का लालच देकर धर्मांतरण का आरोप: धमतरी में हिंदू जागरण मंच ने किया विरोध प्रदर्शन, कोतवाली पुलिस... बस्तर में खनिज विभाग की खुली पोल: कोडेनार के युवाओं ने खुद पकड़े रेत से लदे 8 टिप्पर, अवैध उत्खनन पर...

मुस्लिम दंपती ने शादी के 29 साल बाद फिर से शादी की

  • पहली शादी में पुत्रियों को नहीं मिलता अधिकार

  • पहली जानकारी मिली तो उसका विरोध काफी

  • अब सोशल मीडिया में इसकी सराहना हो रही

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः दक्षिण के अभिनेता सी शुक्कुर और उनकी पत्नी शीना 8 मार्च को दूसरी बार शादी के बंधन में बंधे।  वे पहले से ही विवाहित थे। इस बार नये सिरे से विवाह का फैसला दोनों ने अपनी बेटियों को संपत्ति का अधिकार दिलाने के लिए किया था।

दोनों के दोबारा विवाह करने की जानकारी मिलने पर इसका विरोध भी हुआ था लेकिन जब लोगों को इसके असली मकसद की जानकारी मिली तो सभी ने इस फैसले का स्वागत किया।

पता चला है कि इससे पहले वर्ष 1994 में, सी शुक्कुर और शीना की पहली शादी शरिया कानून (मुस्लिम पर्सनल लॉ) के तहत हुई थी। उस कानून के मुताबिक बेटियां अपने पिता की संपत्ति में दो-तिहाई की हकदार होंगी।

यदि दंपति का कोई उत्तराधिकारी नहीं है, तो पिता की शेष संपत्ति उनकी अनुपस्थिति में शुक्कुर भाइयों के पास चली जाएगी। इसी वजह से इस विवाहित जोड़े को फिर से विशेष विवाह अधिनियम के तहत पुनर्विवाह करना पड़ा। इस दूसरी बार की शादी का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना था कि उनकी संपत्ति उनके बच्चों को दी जाए।

इस अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति की संपत्ति को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार विभाजित किया जा सकता है। एक फेसबुक पोस्ट में सी सुक्कुर ने लिखा कि मैं हाल ही में दो बार मौत के मुंह से वापस आया हूं।

उसके बाद मरने के बाद ख्याल शुरू होता है, क्या मेरी बेटियां इस मेहनत को एंजॉय कर पाएंगी? उन्हें मेरी संपत्ति का हिस्सा पूरा मिलेगा या नहीं, तरह-तरह के विचार मेरे दिमाग में चलते रहे।

शरीयत (मुस्लिम कानून) के मुताबिक बेटियां पिता की सारी संपत्ति में हिस्सा नहीं ले सकतीं। यह कानून भी वसीयत लिखने की अनुमति नहीं देता है। इसलिए मैंने दूसरी बार शादी कर ली। भारत के संविधान में लड़के और लड़कियों में कोई भेद नहीं है। लड़कियों के भविष्य को लेकर यह मेरा फैसला है। सामाजिक स्तर पर इस फैसले की प्रशंसा हो रही है।