झारखंड CGL परीक्षा रद्द होने पर भारी बवाल: प्रोजेक्ट भवन में जबरन घुसे सफल अभ्यर्थी, फफक कर रोए बर्खास्त कर्मी
रांची (झारखंड): राज्य सरकार द्वारा झारखंड संयुक्त स्नातक स्तरीय (JSSC CGL) परीक्षा रद्द किए जाने के निर्णय के बाद सफल अभ्यर्थियों और कार्यरत कर्मियों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया।
बुधवार को भारी बारिश के बीच बड़ी संख्या में आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन (झारखंड मंत्रालय) पहुंचे। सुरक्षाबलों द्वारा रोके जाने पर माहौल तनावपूर्ण हो गया और आक्रोशित प्रदर्शनकारी पुलिस घेरा तोड़ते हुए जबरन प्रोजेक्ट भवन परिसर के भीतर दाखिल हो गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
😭 लिपटकर रोते दिखे बर्खास्त कर्मी: ‘जिस दफ्तर में काम किया, वहीं से निकाल बाहर किया’
परिसर के भीतर हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जहां महीनों से नौकरी कर रहे अभ्यर्थी बेहद भावुक नजर आए:
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रोजी-रोटी का संकट: प्रदर्शन के दौरान कई युवा एक-दूसरे से लिपटकर रोते दिखे। उनका कहना था कि जिस सचिवालय और कार्यालयों में वे कल तक पूरी निष्ठा से काम कर रहे थे, आज उन्हें अचानक बाहर कर दिया गया और देखते ही देखते उनकी नौकरी छीन ली गई।
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भविष्य पर अनिश्चितता: अभ्यर्थियों ने कहा कि सालों की मेहनत और चयन के बाद अचानक परीक्षा रद्द कर दिए जाने से उनके सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है।
👮♂️ पुलिस प्रशासन ने दी चेतावनी, BNSS धारा 163 के उल्लंघन पर कार्रवाई की बात
मंत्रालय परिसर में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभाला:
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परिसर खाली करने का निर्देश: मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को लगातार समझाने का प्रयास किया और चेतावनी दी कि सचिवालय परिसर को तुरंत खाली किया जाए।
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डीएसपी का बयान: मौके पर तैनात डीएसपी नीरज कुमार ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू होने के कारण इस संवेदनशील क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन पूरी तरह गैर-कानूनी है। यदि परिसर खाली नहीं किया गया, तो पुलिस सख्त वैधानिक कार्रवाई करेगी।
🗣️ ‘रातों-रात रद्द करने से सड़क पर आए 2000 कर्मचारी’ — अभ्यर्थियों ने रखी अपनी बात
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने सरकार के इस कदम को असंवैधानिक और जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया:
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प्रिया का बयान: झारखंड मंत्रालय में कार्यरत रही प्रिया ने कहा कि सरकार ने बिना सोचे-समझे पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया, जिससे 2,000 से अधिक कर्मचारी एक ही झटके में सड़क पर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वे कानूनी रास्ता अपनाने के साथ-साथ सड़क पर भी तब तक डटे रहेंगे जब तक सरकार फैसला वापस नहीं लेती।
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पूजा लकड़ा का तर्क: पूजा लकड़ा ने सवाल उठाया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चयन और निरस्तीकरण की एक तय प्रक्रिया होती है; मनमाने ढंग से रातों-रात परीक्षा रद्द करना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
🌧️ खुले आसमान में आंदोलन जारी रखने का संकल्प, फैसला वापस न लेने पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी
आंदोलनकारियों ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया:
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अनुमति न मिलने का आरोप: प्रदर्शनकारी दीनबंधु दुबे ने बताया कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे हैं। मंत्रालय के बाहर टेंट लगाने तक की अनुमति नहीं दी गई, जिसके चलते उन्हें तेज बारिश में खुले आसमान के नीचे आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ा।
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उग्र आंदोलन की चेतावनी: अभ्यर्थियों ने दो टूक कहा कि जब तक सरकार CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेकर उनकी बहाली सुनिश्चित नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले दिनों में इसे राज्यव्यापी स्तर पर और अधिक तेज किया जाएगा।