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सरकार समझ रही है मध्यम वर्ग बहुत नाराज है

केंद्र सरकार की प्राथमिकताएं अब फिर से चुनावी हो चली हैं। लगातार विभिन्न मुद्दों पर बात करने वाले भाजपा नेताओं की बातों के बीच से यह संकेत साफ मिलने लगा है। दरअसल ईंधन और रसोई गैस की वजह से महंगाई की मार से पीड़ित लोगों को अब सिर्फ भाषण आश्वस्त नहीं कर पा रहा है।

दूसरी तरफ भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गांधी बार बार चंद उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की बात कहकर जनता को नये सिरे से सब कुछ सोचने समझने पर मजबूर कर रहे हैं। भाजपा को नीचे से ऊपर तक इस बात का एहसास है कि उग्र राष्ट्रवाद की नैय्या के सहारे शायद इस बार चुनावी वैतरणी पार करना कठिन है।

इसलिए फिर से अब देश मे माहौल बनाने वाले मध्यमवर्ग को अपनी तरफ खींचने का काम तेज हो गया है। इस कड़ी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वह मध्यम वर्ग पर पड़ने वाले दबाव से वाकिफ हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार ने उन पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया है।

निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लोकसभा में 2023-24 के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार आयकर सीमा बढ़ाएगी और मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स के अलावा अन्य को राहत देगी। निर्मला सीतारमण का ये पांचवां बजट होगा। पाञ्चजन्य पत्रिका के एक समारोह में निर्मला सीतारमण ने कहा मैं खुद भी मध्यम वर्ग से ताल्लुक रखती हूं, इसलिए मैं मध्यम वर्ग के दबावों को समझ सकती हूं।

मैं खुद को मध्यम वर्ग से पहचानती हूं, इसलिए मैं जानती हूं।  उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने मिडिल क्लास पर मौजूदा सरकार ने कोई भी नया टैक्स नहीं लगाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि 5 लाख रुपये तक की आय आयकर से मुक्त है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए 27 शहरों में मेट्रो रेल नेटवर्क विकसित करने और 100 स्मार्ट सिटी बनाने जैसे कई कदम उठाए हैं।

वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार मिडिल क्लास के लिए और अधिक कर सकती है। क्योंकि इसकी आबादी बढ़ रही है और अब यह वर्ग काफी बड़ा हो गया है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि मैं उनकी समस्याओं को भलीभांति समझती हूं। सरकार ने उनके लिए बहुत कुछ किया है और वह ऐसा करना जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार 2020 के बजट से हर बजट में इस पर ध्यान देती आ रही है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के लिए इसे 35 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। बैंकिंग सेक्टर पर उन्होंने कहा कि सरकार की 4 आर रणनीति- रिकॉगनिशन, रि कैपिटलाइजेशन, रेजोल्यूशन और रिफर्म ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के फिर से खड़ा होने में काफी मदद की है।

इसकी वजह से एनपीए में गिरावट आई है और पीएसबी के स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है। वित्त मंत्री को यह अच्छी तरह पता है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले का यह अंतिम बजट होगा। इसके बाद 2024 में भी सरकार फरवरी में बजट पेश करेगी लेकिन वो अंतरिम बजट होगा।

ऐसे में चुनाव से पहले उम्मीद है कि सरकार लोगों को कई तरह की रियायतें दे सकती है। इस बार के बजट में टैक्स स्लैब्स में बदलाव भी किए जाने के संकेत रिटायरमेंट से पहले राजस्व सचिव तरुण बजाज ने दिए हैं। लेकिन ये बदलाव पुराने टैक्स सिस्टम में नहीं किए जाएंगे। इन बदलावों को अगर किया गया तो सरकार 2020 में लाए गए नए टैक्स सिस्टम में करेगी।

लेकिन भाजपा नेता अथवा वित्त मंत्री राहुल गांधी द्वारा बार बार उठाये गये उन सवालों का उत्तर नहीं दे पाये हैं, जो अब आम जनता के जेहन में है। किस पूंजीपति का कितना कर्ज माफ किया गया, क्या इसकी वजह से देश की बैंकिंग व्यवस्था बीमार हुई तथा बड़े पूंजीपतियों का कर्ज माफ होने से देश की जनता को क्या नुकसान हुआ, यह सारे सवाल अब जनता के मन में कौंधने लगे हैं।

इसलिए भाजपा को इस बात का एहसास है कि इन सवालों की चर्चा अगर जनता के बीच जारी रही तो उग्र राष्ट्रवाद का पुराना फॉर्मूला शायद काम नहीं आयेगा। दूसरी तरफ राम मंदिर से जुड़ी करोडों लोगों की आस्था भी अब भाजपा को चुनावी लाभ नहीं दिला सकती क्योंकि लोग यह सोचने लगे हैं कि सरकार जब बड़े पूंजीपतियों को लाभ दे सकती है तो देश के आम नागरिक को यह सुविधा क्यों नही मिलती।

इसके अलावा गौतम अडाणी के इस सरकार के कार्यकाल में पूंजीगत लाभ और उस पर बैंकों के कर्ज का मसला भी जनता को सोचने पर मजबूर कर रहा है। लिहाजा सरकार अच्छी तरह समझ रही है कि अब जनता के जख्मों पर फिर से मरहम लगाने का वक्त करीब आ चुका है।