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अमेरिकी फोरेंसिक फर्म ने फादर स्टेन स्वामी के कंप्यूटर पर खुलासा किया

  • एनआईए ने किया था उन्हें गिरफ्तार

  • जमानत नहीं मिली और मौत हो गयी

  • माओवादी बताने के फर्जी सबूत डाले गये थे

राष्ट्रीय खबर

रांचीः महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा केस में अमेरिकी फोरेंसिक फर्म ने कहा है कि दिवंगत फादर स्टेन स्वामी को फंसाया गया था। इस फर्म ने उनके कंप्यूटर की फोरेंसिक जांच करने के बाद रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मामले में एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी को फंसाने के लिए उनके कंप्यूटर में डिजिटल सबूत (आपत्तिजनक डॉक्यूमेंट) डाले गए थे।

स्टेन स्वामी के वकीलों की हायर फोरेंसिक टीम आर्सेनल कंसल्टिंग का कहना है कि कंप्यूटर के डिजिटल फुटप्रिंट्स को पहले स्पाईवेयर से हैक किया गया था। इसके बाद उसमें लगभग 50 फाइलों को हैकर ने कंप्यूटर में प्लांट किया। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि कंप्यूटर ड्राइव में डाक्यूमेंट्स को उस तरीके से प्लांट किया गया जिससे यह साबित हो कि स्वामी और माओवादी विद्रोह के बीच संबंध थे।

बता दें कि महाराष्ट्र के पुणे में भीमा कोरेगांव में 2018 में हुई हिंसा के सिलसिले में कई वामपंथी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया गया है। भीमा कोरेगांव हिंसा केस में नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी  ने 2020 में स्टेन स्वामी आरोप लगाए थे कि स्टेन के नक्सलियों से लिंक हैं और खासतौर पर वे प्रतिबंधित माओवादी संगठन के संपर्क में हैं। वे अक्टूबर 2020 से मुंबई की तलोजा जेल में बंद थे और लगातार उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। पिछले साल ही बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था।

रिपोर्ट में बताया गया कि हमलावर के काम करने के तरीकों के नए सुराग मिले हैं। आर्सनल के पास 11 जून, 2019 की हमलावर की गतिविधियों की कई जानकारी है। पुणे पुलिस के कंप्यूटर जब्त करने के एक दिन पहले हमलावर ने की गई चालाकी की सफाई करने की कोशिश की थी। उसने इसके लिए नेटवायर का इस्तेमाल किया था, जिसे आर्सेनल ने पकड़ा।

नेटवायर उस मालवेयर का नाम है जिसे हैकर्स ने कथित तौर पर स्वामी के कंप्यूटर को ब्रेक करने के लिए इस्तेमाल किया था। साथ ही दावा किया कि स्वामी को पहली बार 20 जुलाई 2017 को हैक किया गया था। तब से लेकर 5 जून 2019 के बीच दो कैम्पेन में उनके कंप्यूटर पर डॉक्यूमेंट पहुंचाए गए थे। स्टेन स्वामी को आरोपित साबित करने के बाद तलोजा जेल भेजे दिया गया था।

वे लगातार गिरती सेहत का हवाला देकर जमानत की अपील कर रहे थे। उनके वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। जहां उनकी हालत बिगड़ती गई।

फादर स्टेन स्वामी ने अंतरिम जमानत की अपील करते हुए कहा था कि यही स्थिति लगातार जारी रही तो जल्द मेरी मौत हो जाएगी। स्टेन के अलावा उनके उनके दूसरे साथियों ने भी कहा था कि जेल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि जेल अधिकारी लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं, टेस्ट, सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी चीजों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

उस समय एनआईए ने स्टेन स्वामी को जमानत दिए जाने का विरोध किया था। अब इस अमेरिकी फर्म के नये खुलासे से भारतीय जांच एजेंसी फिर से संदेह के घेरे में आ गयी है। उसके पीछे कौन अधिकारी थे, इसका खुलासा अब तक नहीं हो पाया है। लेकिन यह धीरे धीरे स्पष्ट होता जा रहा है कि इस पूरे मामले के पीछे आरएसएस से जुड़े लोगों का हाथ हो सकता है।