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Mumbai Water Crisis: मुंबई में पानी का संकट गहराया; टैंकर ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से थमा पानी का पहिया

मुंबई: मुंबई पहले से ही गिरते जलस्तर और पानी की कटौती से जूझ रही थी, लेकिन अब शहर के लिए एक नया संकट खड़ा हो गया है। टैंकर व्यवसायियों ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) के नए नियमों के विरोध में आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था चरमराने की आशंका है, जिससे आम नागरिक से लेकर अस्पतालों तक सभी प्रभावित हो सकते हैं।

🚫 हड़ताल का मुख्य कारण: क्या हैं नए नियम?

टैंकर ऑपरेटरों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा जमीन से पानी निकालने के लिए लागू किए गए नियम मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर के लिए अव्यावहारिक हैं। नए नियमों में मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • प्रत्येक टैंकर के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना अनिवार्य।

  • बोरवेल के लिए न्यूनतम 200 वर्ग मीटर जमीन की शर्त।

  • डिजिटल फ्लो मीटर और टेलीमेट्री सिस्टम की अनिवार्य स्थापना।

  • प्रतिदिन पानी निकालने की सीमा 50 हजार लीटर तक सीमित।

  • नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और टैंकर जब्ती का प्रावधान।

🏥 सेवाओं पर प्रभाव: अस्पताल और निर्माण कार्य खतरे में

हड़ताल का असर शहर के उन इलाकों में सबसे ज्यादा होगा जो पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर हैं। बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पानी की आपूर्ति बंद होने से नगर निगम के अस्पतालों, आवश्यक सेवाओं और निर्माण परियोजनाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। टैंकर संचालकों की इस हड़ताल से झुग्गी-बस्तियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी जल संकट गहराने की चेतावनी दी गई है।