सरकार पहले अपने जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाया करे
ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया पर आंदोलन
परीक्षाएं पारदर्शी और कदाचार मुक्त हो
छात्रों की शिकायत पर ध्यान दिया जाएगा
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में पुणे में चल रहे छात्र आंदोलनों के संबंध में एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि यदि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धांधली पाई जाती है, तो छात्रों को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य सरकार का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सभी सार्वजनिक भर्ती परीक्षाएं पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और कदाचार मुक्त हों। अदालत ने कहा कि राज्य को यह पुख्ता भरोसा दिलाना होगा कि परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, जिससे छात्रों का व्यवस्था के प्रति विश्वास फिर से कायम हो सके। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों का भविष्य उनकी कड़ी मेहनत और लंबी पढ़ाई पर निर्भर करता है, इसलिए यदि उन्हें प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनिमितता का अंदेशा होता है, तो उनका विरोध जताना स्वाभाविक और न्यायसंगत है।
इसके साथ ही, अदालत ने पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ संयम बरतने और कोई भी प्राथमिकी दर्ज न करने के कदम की सराहना की। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वे देश के भविष्य हैं, कोई असामाजिक तत्व नहीं हैं। हालांकि, अदालत ने छात्रों से यह अपील भी की कि चूंकि अब न्यायपालिका ने इस मामले का स्वतः संज्ञान ले लिया है और वह इस पर विचार कर रही है, इसलिए छात्रों को अपने विरोध प्रदर्शन समाप्त कर अपनी पढ़ाई पर वापस ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अदालत ने आश्वासन दिया कि छात्रों की शिकायतों का गंभीरता से समाधान किया जाएगा।
दूसरी ओर, यह याचिका पुणे के स्थानीय नागरिकों अमित सुपेकर और सौरभ विरकर द्वारा दायर की गई थी, जिसमें सार्वजनिक स्थानों के अनाधिकृत उपयोग और उसके कारण शहर में उत्पन्न हुई भारी ट्रैफिक जाम व नागरिक असुविधा का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि पुणे शहर में विरोध प्रदर्शनों के लिए एक निश्चित क्षेत्र (प्रोटेस्ट ज़ोन) तय किया जाए और बिना अनुमति सार्वजनिक जगहों पर कब्जा करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस पर अदालत ने प्रदर्शनकारियों को यह भी चेतावनी दी कि वे इस बात का पूरा ध्यान रखें कि उनके आंदोलन से किसी भी आम नागरिक को परेशानी न हो।