Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
IRCTC Tour: रांची के श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी! भारत गौरव ट्रेन से करें 6 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा,... Nalanda Temple Stampede: बिहार के नालंदा में शीतला माता मंदिर में भगदड़, 8 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौ... IPL 2026: रवींद्र जडेजा का इमोशनल पल, लाइव मैच में रोने के बाद 'पुराने प्यार' को किया किस। Honey Singh Concert: हनी सिंह के कॉन्सर्ट में सुरक्षा के साथ खिलवाड़! चेतावनी के बाद भी तोड़े एयरपोर... Financial Deadline: 31 मार्च तक निपटा लें ये 6 जरूरी काम, वरना कटेगी जेब और भरना होगा भारी जुर्माना New IT Rules 2026: बदल जाएंगे डिजिटल नियम, केंद्र सरकार के आदेश को मानना अब सोशल मीडिया के लिए होगा ... Hanuman Ji Puja Rules for Women: महिलाएं हनुमान जी की पूजा करते समय न करें ये गलतियां, जानें सही निय... पुराना मटका भी देगा फ्रिज जैसा ठंडा पानी, बस अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स। Baisakhi 2026: बैसाखी पर पाकिस्तान जाएंगे 3000 भारतीय सिख श्रद्धालु, ननकाना साहिब और लाहौर के करेंगे... Puducherry Election: पुडुचेरी में INDIA गठबंधन की बढ़ी टेंशन, 'फ्रेंडली फाइट' से बिखर सकता है खेल!

इंसानी कद का भी जेनेटिक्स से सीधा रिश्ता है

  • बच्चों पर भी दिखता है इसका असर

  • इससे कई किस्म की बीमारियां जुड़ी हैं

  • नाटे कद का मानसिक तनाव अधिक होता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः इंसानी कद का उसके शरीर में मौजूद जेनेटिक कोड के साथ सीधा रिश्ता होता है। पहली बार वैज्ञानिकों ने पचास लाख लोगों के जेनेटिक आंकड़ों की भली भांति जांच कर लेने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। इस क्रम में अधिक लंबाई के कौन कौन से जेनेटिक कारण हैं, उनकी भी परख की गयी है। यह पाया गया है कि कद के मामले में जेनेटिक विविधता के बारह हजार कारण होते हैं।

इसके आधार पर आगे की शोध का काम चल रहा है। जिसका मकसद गलत लंबाई से होने वाली बीमारी और मानसिक परेशानियों का समाधान खोजना भी है। यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के शोध दल ने इस पर काम किया है और हर चीज को परख लेने के बाद यह बात सार्वजनिक की है। जेनेटिक प्रभाव बच्चों में भी कभी कभार दिख जाता है जबकि कोई  बच्चा अपने हमउम्र बच्चों के मुकाबले अधिक लंबा हो जाता है। कई बार लंबाई तेजी से बढ़ने की यह प्रक्रिया खास आयु सीमा के बाद होती है।

शोधदल ने यह काम अधिक या कम लंबाई से होने वाली परेशानियों का निदान खोजने के लिए प्रारंभ किया था। यह देखा गया है कि कई लोग औसत से काफी अधिक लंबे हो जाते हैं। इस अत्यधिक लंबाई की वजह से उन्हें कई किस्म की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। दूसरी तरफ अत्यधिक नाटा कद के लोगों को भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है।

दोनों में यह अंतर क्यों है, उसकी जांच के क्रम में यह जेनेटिक गुत्थी को सुलझाया गया है। इससे पहले इंसानी लंबाई के साथ जेनेटिक संबंधों पर ऐसी शोध पहले कभी नहीं हुई थी। इस शोध से जुड़े लोग यह उम्मीद भी कर रहे हैं कि जेनेटिक कोड को सही तरीके से समझ लेने के बाद अधिक अथवा कम लंबाई का ईलाज भी जेनेटिक कोड में संशोधन से किया जा सकेगा। वरना अभी यह भारी परेशानियों का कारण भी बनती चली जाती है।

इसके मूल में कौन कौन से जेनेटिक कोड हैं, उसकी पहचान का काम भी चल रहा है ताकि बच्चों की जांच में शिशु रोग विशेषज्ञ प्रारंभिक अवस्था में ही इन खामियों को दूर कर सकें। इस शोध से जुड़े यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के लोइक येंगो ने कहा कि लोगों में अस्सी प्रतिशत कद वाली बात जेनेटिक कारणों से ही होती है।

निरंतर शोध में इसके लिए अभी बारह हजार ऐसे कारणों की पहचान हो पायी है। चालीस अलग अलग किस्म के कदों में यह जेनेटिक कारण तलाशे जा चुके हैं। अब डीएनए जांच से शोध को इससे आगे ले जाने पर काम चल रहा है। इतनी अधिक संख्या में जेनेटिक आंकड़े उपलब्ध होने की वजह से शोध दल के लिए इस पर काम करना और किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना आसान हुआ है। इस शोध की खास बात यह है कि इसमें शामिल किये गये आंकड़ों में से दस लाख लोग ऐसे थे, जो यूरोप के निवासी नहीं है।

इसलिए पूरी दुनिया पर यह एक जैसा काम करता है, इसे स्वीकार किया जा सकता है। इस कद संबंधी विसंगति की वजह से इंसान के हड्डी की संरचना में भी गड़बड़ी होती है, यह पहले से पता है। अब इस शोध को जिनोम के स्तर तक ले जाने और कद संबंधी कोई स्थायी जेनेटिक उपचार खोजने की दिशा में भी काम हो रहा है। शोध दल के लोग इस खोज को और व्यापक बनाने के लिए दो करोड़ लोगों के जेनेटिक कोडों की जांच से और बेहतर नतीजा निकालना चाहते हैं।