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राजस्थान के वरिष्ठ नौकरशाह की संपत्तियां विवादों में

आईएएस शिखर अग्रवाल को पद से हटाया गया

जिससे खरीदा उसी को किराया पर दिया

उनकी पत्नी भी आईपीएस अफसर है

सारे रिसार्ट और विला जैसी संपत्ति है

राष्ट्रीय खबर

जयपुर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल को बुधवार देर रात पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में डाल दिया गया। यह कार्रवाई एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें उनके और उनके परिवार द्वारा एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने तथा बाद में उन्हें उसी फर्म को वापस लीज पर देने पर सवाल उठाए गए थे।

कार्मिक विभाग ने इस फैसले के पीछे प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है। 1993 बैच के अधिकारी अग्रवाल के पास उद्योग एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा रीको के अध्यक्ष सहित कई प्रमुख जिम्मेदारियां थीं। इससे पहले वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में भी सेवा दे चुके थे। हालांकि, आदेश में स्पष्ट रूप से इस फैसले को संपत्ति के सौदों की रिपोर्ट से नहीं जोड़ा गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अग्रवाल, उनकी आईपीएस अधिकारी पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके दो बेटों और उनके सास-ससुर ने लगभग ढाई वर्षों की अवधि में गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से बुझड़ा (उदयपुर) में 20 कॉटेज और अजबगढ़ (अलवर) में 20 विला खरीदे थे। इनकी कुल खरीद कीमत 6.165 करोड़ रुपये बताई गई थी। आरोप है कि इन संपत्तियों को 4 लाख रुपये प्रति कॉटेज और 5 लाख रुपये प्रति विला की वार्षिक दर पर उसी कंपनी को वापस लीज पर दे दिया गया, जिससे प्रतिवर्ष 1.80 करोड़ रुपये की आय होती है।

इस बीच, 27 मार्च 2026 की तारीख वाला राज्य वित्त विभाग का एक कथित दस्तावेज सामने आया है, जिसमें अलवर में गोयल फैशंस के होटल और रिसॉर्ट प्रोजेक्ट के लिए अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज का विवरण है। दस्तावेज की तारीख और परिवार के 20 अजबगढ़ विला के पंजीकरण की तारीख एक ही बताई जा रही है। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत इस पैकेज के जरिए कंपनी को 10 वर्षों के लिए राज्य कर सब्सिडी और बिजली शुल्क से पूर्ण छूट जैसे लाभ दिए जाने थे।

मीडिया रिपोर्टों में वार्षिक अचल संपत्ति विवरण में इन संपत्तियों के प्रकटीकरण (डिस्क्लोजर) पर भी सवाल उठाए गए हैं, हालांकि अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने अपनी संपत्ति और टैक्स रिटर्न में इनका पूरा विवरण दिया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है; ऐसे में शीर्ष प्रशासनिक पद की दौड़ में शामिल अग्रवाल को एपीओ किए जाने से उनके भविष्य के प्रशासनिक करियर पर सवाल खड़े हो गए हैं।