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नये महाभियोग नोटिस की जांच करेंगेः ओम बिड़ला

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और तेज हुई

दोबारा इसकी चर्चा काफी तेज हो रही है

विपक्ष ने पहले भी दो बार प्रयास किये

नोटिस अभी उच्च सदन में लंबित है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करने वाले किसी भी नए नोटिस की जांच संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी। उनका यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर कुमार को हटाने की विपक्ष की बढ़ती मांगों के बीच आया है। विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हाल के हफ्तों में अपने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं।

विपक्ष ने कुमार के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने के दो पूर्व प्रयास किए हैं। पहले प्रयास के दौरान प्रस्तुत किए गए नोटिसों को लोकसभा और राज्यसभा दोनों द्वारा खारिज कर दिया गया था। हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए संदर्भों के अनुसार दूसरे प्रयास के नोटिस अभी भी उच्च सदन में लंबित हैं।

जब पत्रकारों ने बिरला से पूछा कि क्या मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ एक और महाभियोग नोटिस लाया जा सकता है, तो अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि किसी भी नए आवेदन पर लागू संसदीय नियमों के तहत ही कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह संकेत नहीं दिया कि नया नोटिस औपचारिक रूप से जमा किया गया है या नहीं और न ही इसके परिणाम के बारे में कोई टिप्पणी की। यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब विपक्षी दल लगातार एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के संचालन पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव संस्था से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पिछले दो हफ्तों में और तेज हो गए हैं, जिसमें विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में विसंगतियों का आरोप लगाया है। उन्होंने उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि इस अभ्यास से जुड़ी चिंताओं पर निर्वाचन आयोग को स्पष्ट स्पष्टीकरण देना चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों की समीक्षा और उन्हें अद्यतन (अपडेट) करना है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिन्होंने निर्णयों की पारदर्शिता और मतदाताओं से संबंधित जानकारी के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां जताई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों का आरोप था कि कुछ आदेश उनकी जानकारी या सिफारिशों के बिना जारी किए गए थे। इन कथित आपत्तियों ने निर्वाचन आयोग के आंतरिक निर्णय लेने और मतदाता सूची पुनरीक्षण अभ्यास के प्रबंधन की फिर से गहन जांच की स्थिति पैदा कर दी है।