आरएएफ फेयरफोर्ड साजिश के पीछे ईरान का हाथ
लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने सोमवार को संसद में एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि सितंबर महीने में आरएएफ फेयरफोर्ड वायुसेना ठिकाने पर रची गई संदिग्ध आतंकवादी साजिश के पीछे लगभग निश्चित रूप से ईरान की सेना का हाथ था। उल्लेख्य है कि इस एयरबेस का उपयोग अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के लिए किया जाता रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बर्नहैम ने संसद को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि इस घटना के विरोध में ईरान के खिलाफ और अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे। संसद में अपनी बात रखते हुए उन्होंने पुष्टि की, हमारे आकलन के अनुसार इस साजिश का समन्वय ईरान के भीतर से किए जाने की अत्यधिक संभावना है, और इसे लगभग निश्चित रूप से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा निर्देशित किया गया था।
ज्ञात हो कि यह घटना 27 सितंबर की आधी रात को वायुसेना ठिकाने के पास स्थित व्हेल्फ़ॉर्ड में हुई थी। इस मामले में गिरफ्तार किए गए सात लोगों को बाद में रिहा कर दिया गया था और अब तक किसी पर भी औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं। ब्रिटिश सरकार ने इस घटना से जुड़ी बेहद सीमित जानकारियाँ ही सार्वजनिक की हैं। ड्रोन हमलों की आशंकाओं के बीच अमेरिका ने घटना के लगभग एक सप्ताह बाद फेयरफोर्ड बेस से अपने 12 बी-1 बमवर्षक विमान वहां से हटा लिए थे।
ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने बताया कि विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने ब्रिटेन में तैनात ईरानी राजदूत से बातचीत की और इस दुर्भावनापूर्ण गतिविधि के लिए आधिकारिक तौर पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की। इसके साथ ही ब्रिटेन ने यूरोप और अमेरिका में ईरान सरकार की ओर से जासूसी तथा हमलों को अंजाम देने में शामिल दो व्यक्तियों पर सीधे प्रतिबंध लगा दिए हैं।
गृह मंत्री महमूद ने कहा, विदेश मंत्री मिलिबैंड हमारी सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने की ईरान की निरंतर कोशिशों की कड़े शब्दों मं निंदा करेंगे। हम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाली ईरान की क्षमता को सीमित करने के लिए आगे भी सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
ब्रिटेन के विदेश कार्यालय द्वारा अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय सहयोगियों का एक संयुक्त बयान जारी किया गया है। इस बयान में कहा गया है कि यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अपने गुप्त नेटवर्क और छद्म संगठनों के माध्यम से अपनी सीमाओं के बाहर भी आक्रामक और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को अंजाम देने की मंशा रखता है। संयुक्त बयान में ईरानी एजेंटों को पूरे यूरोप में ईरानी पत्रकारों, यहूदी समुदायों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाकर किए गए हालिया हमलों से भी जोड़ा गया है।