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पंद्रहवी शताब्दी में हुसैन शाह के जमाने से जारी है

पारंपरिक तरीके से होती है मल्लिक परिवार की पूजा

एक ढांचे पर बनती है सारी प्रतिमाएं

वैष्णव परंपरा के अनुसार होती है पूजा

अब तो फिल्मी कलाकार भी आते हैं यहां

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः कोलकाता के भवानीपुर का प्रतिष्ठित मल्लिक परिवार बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का एक जीवंत उदाहरण है। यह परिवार लगभग 15वीं शताब्दी ईस्वी में नवाब हुसैन शाह के शासनकाल से चली आ रही एक प्राचीन परंपरा के तहत हर साल दुर्गा पूजा का आयोजन करता है। इसे कोलकाता की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक दुर्गा पूजाओं में से एक माना जाता है, जो आज भी अपनी पारंपरिक गरिमा और धार्मिक निष्ठा के साथ आयोजित की जाती है।

इस ऐतिहासिक दुर्गा पूजा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ देवी दुर्गा की प्रतिमा लकड़ी के एक ही आधार में बनी प्रतिमा पूजी जाती है, जिसका अर्थ है कि माँ दुर्गा और उनके सभी बच्चों की मूर्तियाँ एक ही मुख्य ढांचे या फ्रेम में सजी होती हैं। यह प्राचीन शिल्प शैली और कला रूप बंगाल की पारंपरिक मूर्तिकला का एक बेहतरीन नमूना है। देश की पुरानी और पारंपरिक पूजा में प्रतिमा निर्माण में अब भी इसी नियम का पालन किया जाता है।

मल्लिक परिवार के इस भव्य और ऐतिहासिक अनुष्ठान की एक और खास बात यह है कि यहाँ पूजा की रस्में परिवार के भीतर दो अलग-अलग परिसरों—दुर्गा दालान और अन्नपूर्णा दालान—में पूरी निष्ठा के साथ संपन्न की जाती हैं। पूजा के दौरान होने वाले सभी धार्मिक विधान और अनुष्ठान प्राचीन परंपराओं और नियमों के अनुसार ही किए जाते हैं, जिससे इस आयोजन की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

यह परिवार वैष्णव परंपरा का अनुयायी है। इस गहरी धार्मिक आस्था के कारण, मल्लिक परिवार के सभी सदस्य और इस आयोजन से जुड़े लोग दुर्गा पूजा के पाँच दिनों के दौरान पूरी तरह से शुद्ध और सात्विक शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करते हैं। यह नियम परिवार की आध्यात्मिक और पारंपरिक जीवनशैली के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।

दुर्गा पूजा के इन पाँच दिनों में कई महत्वपूर्ण और पारंपरिक अनुष्ठान देखने को मिलते हैं, जो इस उत्सव को और अधिक खास बनाते हैं। इनमें विजया दशमी के पावन अवसर पर होने वाला प्रसिद्ध सिंदूर खेला शामिल है, जिसमें महिलाएँ माता को सिंदूर अर्पित कर सुहाग की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती हैं। इसके अलावा, विजया दशमी के दिन ही अष्टदूर्बा का आशीर्वाद ने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो परिवार और समाज में सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। भवानीपुर के मल्लिक परिवार की यह दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर, पारिवारिक परंपराओं और अटूट आस्था का एक अनुपम संगम है। इस परिवार में रंजीत मल्लिक और उनकी पुत्री कोयल मल्लिक के फिल्म जगत से जुड़े होने की वजह से पूजा का ग्लैमर हमेशा ही दूसरों से अलग होता है क्योंकि अनेक फिल्मी कलाकार भी यहां की पूजा में शामिल होते हैं।