Breaking News in Hindi

रूस में अब नये किस्म का असंतोष व्यक्त करने का तरीका

दुखों को भुलाने सड़कों पर कोरस गा रहे हैं

मॉस्कोः रूस में मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के बीच एक अनूठा और बेहद भावुक सांस्कृतिक चलन देखने को मिल रहा है, जहां आम नागरिक सड़कों पर इकट्ठा होकर सामूहिक रूप से गाने गा रहे हैं। इस अनोखे आंदोलन के जरिए लोग या तो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के गहरे दुखों और तनाव से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं, या फिर सत्ता और मौजूदा हालात के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपना मौन असंतोष और विरोध दर्ज करा रहे हैं। इन सड़कों पर गूंजने वाले सुर केवल संगीत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह रूसी समाज के भीतर चल रहे गहरे मानसिक और भावनात्मक संघर्ष का एक शक्तिशाली माध्यम बन चुके हैं।

देश में चल रहे राजनीतिक तनाव, आर्थिक दबाव और कड़े सरकारी प्रतिबंधों के बीच खुलेआम विरोध प्रदर्शन करना जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में नागरिकों ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए स्ट्रीट कॉइर (सड़क पर सामूहिक गायन) का यह शांतिपूर्ण रास्ता चुना है। जब लोग एक साथ मिलकर पुराने लोकगीत या प्रतिरोध के गीत गाते हैं, तो यह न केवल उन्हें आपसी एकता का अहसास कराता है, बल्कि बिना किसी नारे या हंगामे के प्रशासन को एक कड़ा संदेश भी देता है। संगीत की यह भाषा सेंसरशिप के उन कड़े पहरों को भेदने में सफल हो रही है जो पारंपरिक विरोध प्रदर्शनों पर लगा दिए गए हैं।

इस तरह के सामूहिक गायन में भाग लेने वाले लोगों का कहना है कि यह उनके लिए एक प्रकार का सामूहिक चिकित्सा सत्र (कलेक्टिव थेरेपी) जैसा है, जो युद्ध और अनिश्चितता के इस दौर में उन्हें मानसिक संबल प्रदान करता है। एक तरफ जहां कुछ लोग अपने भीतर के गम और अकेलेपन को संगीत के सुरों में बहा देना चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई समूहों के लिए यह सरकार की नीतियों के प्रति अपनी असहमति जताने का एक सृजनात्मक तरीका है। पुलिस और सुरक्षा बल भी अक्सर असमंजस में रहते हैं कि सड़क पर गा रहे इन आम नागरिकों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाए, क्योंकि कानूनी रूप से गाना गाना सीधे तौर पर जुर्म के दायरे में नहीं आता है।

यह सांस्कृतिक परिघटना इस बात का प्रमाण है कि कठिन से कठिन समय में भी मानवीय अभिव्यक्ति और विरोध के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं होते हैं। जब दमनकारी परिस्थितियां बढ़ जाती हैं, तब कला, साहित्य और संगीत समाज की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरते हैं। रूस की इन सड़कों पर गूंजने वाले सुर आने वाले समय में सामाजिक बदलाव और जनभावनाओं का एक ऐतिहासिक दस्तावेज बन सकते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि भय के माहौल में भी नागरिक अपनी आवाज दर्ज कराने के नए और अनूठे तरीके तलाश ही लेते हैं।