राहुल गांधी की पूर्व चेतावनी अब सामने आने लगी है
यूक्रेन युद्ध का असर का उल्लेख किया
पचास वर्षों में पांच बार ऐसा हो चुका है
ईरान युद्ध के तेल के दाम प्रभावित हुए
न्यूयार्कः भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया भर में मंडरा रहे खाद्य सुरक्षा के संकट को लेकर एक बेहद गंभीर और विचारणीय चेतावनी जारी की है। उन्होंने अपने हालिया बयानों और वैश्विक मंचों पर इस बात पर जोर दिया है कि वैश्विक स्तर पर भोजन और कृषि आपूर्ति की स्थिति कितनी संवेदनशील होती जा रही है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि किस प्रकार पिछले 50 वर्षों के लंबे अंतराल में दुनिया को कुल पांच बार इस तरह के भीषण खाद्य संकट या खाद्यान्न आपूर्ति की भारी कमी का सामना करना पड़ा है।
वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के इतिहास पर नजर डालें तो आधुनिक दुनिया ने खाद्य असुरक्षा और महंगाई के कई दौर देखे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा रेखांकित किए गए इन पांच ऐतिहासिक दौरों की शुरुआत 1970 के दशक के प्रसिद्ध तेल झटके से होती है। उस समय मध्य पूर्व के देशों में उपजे राजनीतिक और आर्थिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई थी, जिसका सीधा और विनाशकारी असर वैश्विक कृषि उत्पादन, उर्वरक की कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ा था। इसके परिणामस्वरूप पूरी दुनिया को भारी खाद्यान्न संकट और महंगाई की मार झेलनी पड़ी थी।
इसके बाद के दशकों में भी दुनिया ने अलग-अलग कारणों से खाद्य संकट के भयानक दौर देखे हैं। इनमें विभिन्न समय पर आए भयंकर सूखे, मौसम में अचानक आए बड़े बदलाव, वैश्विक महामारियां और भू-राजनीतिक संघर्ष शामिल हैं। इन सभी संकटों ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनाज की आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया।
खाद्य संकट के इन ऐतिहासिक चरणों की श्रृंखला में सबसे हालिया और महत्वपूर्ण अध्याय यूक्रेन संघर्ष का रहा है। रूस और यूक्रेन को दुनिया का अन्न का कटोरा कहा जाता है, खासकर गेहूं और सूरजमुखी के तेल के मामले में। जब इन दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ा, तो काला सागर के रास्ते होने वाली अनाज की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इस एक घटना ने विकासशील देशों से लेकर विकसित राष्ट्रों तक को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छूने लगे और भुखमरी व कुपोषण का खतरा फिर से गहरा गया।
विदेश मंत्री का यह बयान इस बात की याद दिलाता है कि ऊर्जा संकट, युद्ध और जलवायु परिवर्तन जैसे बाहरी झटके किसी भी देश की खाद्य सुरक्षा को रातों-रात खतरे में डाल सकते हैं। वर्तमान समय में जब दुनिया अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, तब देशों को आपसी सहयोग मजबूत करने और कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की अत्यंत आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के किसी भी बड़े वैश्विक संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।