डोनाल्ड ट्रंप की बातों को सिरे से नकार दिया राष्ट्रपति ने
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशियन ने हाल ही में एक विशेष साक्षात्कार में अमेरिका और इजराइल द्वारा फरवरी से शुरू किए गए हमलों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान द्वारा परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को बढ़ाने का दावा महज एक फर्जी प्रोपेगैंडा और सैन्य आक्रमण शुरू करने का एक बहाना भर है। राष्ट्रपति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि उनका देश परमाणु हथियार हासिल करना चाहता, तो वह कभी भी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का सदस्य नहीं बनता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की सभी परमाणु गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और सिद्धांतों के पूर्ण दायरे में रहकर ही संचालित की जाती रही हैं और उन पर निरंतर कड़ी निगरानी रखी जाती है।
पेजेशियन ने अमेरिका और इजराइल के सामने सवाल खड़ा किया कि उनके पास ईरान पर हमले को सही साबित करने के लिए ऐसा कौन सा ठोस सबूत मौजूद है। उन्होंने इजराइल की परमाणु क्षमताओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बरती जा रही चुप्पी पर भी सवाल उठाया, जबकि इजराइल एनपीटी का सदस्य भी नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने गाजा और लेबनान में इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हुए आम नागरिकों की हत्या और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नीतियों के इस विरोध के कारण ईरान पर हमले करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है और इसके प्रति दुनिया की चुप्पी भी चिंता का विषय है।
परमाणु वार्ता की संभावनाओं के संबंध में उन्होंने कहा कि तेहरान एनपीटी के स्थापित ढांचे और अंतरराष्ट्रीय रूप से स्वीकृत सिद्धांतों के तहत परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने मौजूदा हालात में अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष वार्ताओं में तुरंत लौटने की संभावना से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी विश्वास को बेहद गहरी और अपूरणीय क्षति पहुंची है।
राष्ट्रपति पेजेशियन ने रेखांकित किया कि युद्ध के पहले ही दिन देश के शीर्ष नेता की हत्या कर दिए जाने के बाद ईरानी समाज के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बिना किसी पूर्व शर्त के सीधी बातचीत की मेज पर लौटना वर्तमान परिस्थितियों में बेहद कठिन और संवेदनशील विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के गंभीर हालात में विश्वास के माहौल को फिर से बहाल करने की सख्त जरूरत है, ताकि तेहरान को यह पूरा भरोसा हो सके कि अमेरिका अपने भविष्य के समझौतों और वचनों का पूरी ईमानदारी से पालन करेगा।