स्वयंभू बाबा बागेश्वर का बचाव किया मुख्यमंत्री ने
बाबा का बयान सार्वजनिक तो है
लोग अपना फैसला खुद ले सकते हैं
बाबा का फोटो जलाने वालों को गिरफ्तार करेंगे
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मध्य प्रदेश के एक स्वयंभू धार्मिक उपदेशक (बाबा धीरेंद्र शास्त्री) का खुलकर बचाव किया है, जिन्होंने हाल ही में आगामी दुर्गा पूजा और नवरात्रि के त्योहारों के दौरान खुले में मांसाहार से बचने की सार्वजनिक सलाह दी थी।
मुख्यमंत्री ने एक सार्वजनिक मंच से इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि एक संत ने अपनी व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं के तहत राष्ट्रवाद, सनातन संस्कृति और परंपराओं पर अपने विचार रखे थे, जिसे अपनी इच्छा से स्वीकार करना या पूरी तरह से अस्वीकार करना हर स्वतंत्र नागरिक का अपना व्यक्तिगत अधिकार है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि उस उपदेशक ने अपनी इन बातों को किसी भी व्यक्ति या वर्ग विशेष पर जबरन थोपने का कोई प्रयास नहीं किया था।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यहीं नहीं रुकीं, बल्कि उन्होंने भवानीपुर पुलिस स्टेशन के ठीक बाहर उस धार्मिक उपदेशक की तस्वीरों को विरोध स्वरूप जलाने वाले प्रदर्शनकारियों की कड़ी निंदा की। उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए राज्य के पुलिस कमिश्नर को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून अपने हाथ में लेकर सार्वजनिक रूप से तस्वीरें और पुतले जलाने वाले ऐसे सभी उपद्रवी लोगों को चिन्हित कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले इस धार्मिक वक्ता ने गत 6 सितंबर को एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि आगामी नवरात्रि और दुर्गा पूजा के पावन दिनों के दौरान पंडालों या देवी प्रतिमाओं के आसपास किसी भी स्थिति में मांसाहारी भोजन की बिक्री नहीं की जानी चाहिए।
इस एक तीखे बयान ने पूरे पश्चिम बंगाल में खान-पान की पारंपरिक प्राथमिकताओं, संस्कृति और लोक-आचरण को लेकर एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया था। राज्य के आम नागरिकों और बुद्धिजीवियों ने इस प्रकार के बयानों पर गहरी आपत्ति जताते हुए मुखर होकर विरोध किया और साफ शब्दों में कहा कि अन्य क्षेत्रों या राज्यों से आने वाले बाहरी लोग बंगाल की सदियों पुरानी संस्कृति और यहाँ के निवासियों को उनके खान-पान की आदतों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं रखते हैं।
इस पूरे संवेदनशील मुद्दे पर राज्य की राजनीति भी पूरी तरह से गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने भी इस धार्मिक उपदेशक के बयानों की कड़ी भर्त्सना की और इसे बंगाली संस्कृति के ताने-बाने पर सीधा हमला करार दिया। दूसरी तरफ, इस तीखी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया के बीच भारतीय जनता पार्टी को भारी वैचारिक असहजता का सामना करना पड़ा।
स्थिति की नजाकत को भांपते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने तुरंत मैदान में उतरकर पार्टी की तरफ से डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि दुनिया की कोई भी ताकत या व्यक्ति बंगाल के निवासियों को उनका पारंपरिक मांसाहारी भोजन छोड़ने के लिए विवश नहीं कर सकता।
अपने इस तर्क के समर्थन में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक उदाहरण का हवाला देते हुए याद दिलाया कि माँ काली को पारंपरिक रूप से भोग और प्रसाद के रूप में मांस अर्पित किया जाता रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति स्वामी विवेकानंद की इस स्थापित परंपरा से ऊपर उठने का प्रयास करता है, तो यह बेहद खतरनाक और अस्वीकार्य है, तथा वह बयान पूरी तरह से उस उपदेशक की अपनी निजी राय भर था।