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पंचायत से पहले भाजपा को जेन-जी का डर, कटक में बदला पूरा रोडमैप

कार्यकारिणी की बैठक में नहीं आए धर्मेंद्र प्रधान

दो दिनों की बैठक में कई फैसले लिये गये

युवाओँ की नाराजगी को स्वीकार किया गया

पार्टी के नये फैसलों से सहमत नहीं प्रधान

प्रसन्न मोहंति

भुवनेश्वरः कटक के नेताजी इंडोर स्टेडियम में दो दिन तक चली भाजपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को खत्म हो गई। बैठक में पार्टी ने पहली बार खुलकर कबूल किया कि युवाओं में सरकार के खिलाफ गुस्सा है। इसी गुस्से को शांत करने के लिए 2027 के पंचायत और निकाय चुनाव का पूरा रोडमैप बदलकर जेन-जी सेंट्रिक कर दिया गया। लेकिन इस पूरी बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा रोडमैप की नहीं, बल्कि एक गैरमौजूदगी की रही। पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा में मौजूद रहने के बावजूद कटक की बैठक में नहीं आए।

राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील बंसल, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल की मौजूदगी में नेपाल के जेन-जी आंदोलन का हवाला दिया गया। बंसल ने कहा, नेपाल में सरकार इसलिए गिरी क्योंकि जेन-जी को हल्के में लिया गया। ओडिशा में 38 फीसद वोटर जेन-जी है। बैठक में माना गया कि युवा 4 वजहों से नाराज है – भर्ती में देरी, पंचायत के ठेके आज भी बीजेडी के लोगों के पास, सुभद्रा योजना पर सोशल मीडिया ट्रोलिंग और नेताओं की पुरानी भाषा। इस गुस्से को दूर करने के लिए 5 फैसले लिए गए – 40 प्रतिशत टिकट जेन-जी को, एक महीने में 25 हजार नौकरियां, पर्चा नहीं रील से प्रचार, हर पंचायत में फ्री वाई फाई यूथ अड्डा और हर रविवार सीएम का इंस्टा लाइव।

सूत्रों के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान पिछले दो दिनों से ओडिशा में ही हैं, इसके बावजूद वे कटक की इतनी अहम बैठक में नहीं पहुंचे। पार्टी की ओर से कहा गया कि वे पूर्व निर्धारित निजी कार्यक्रमों में व्यस्त थे, लेकिन बैठक में मौजूद कई विधायकों ने दबी जुबान में कहा कि 2024 में ओडिशा में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के मुख्य रणनीतिकार रहे प्रधान, पंचायत में पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर सिर्फ जेन-जी को टिकट देने के फॉर्मूले से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, धर्मेंद्र जी ओडिशा में हैं, फिर भी कार्यकारिणी में नहीं आए। ये सिर्फ गैरमौजूदगी नहीं है, ये एक बड़ा सियासी संदेश है। कटक की बैठक ने दो बातें साफ कर दीं। भाजपा को जेन-जी का डर सता रहा है, और इस डर से निपटने के नए प्लान पर पार्टी के भीतर अभी एकराय नहीं है।