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कोंडा सुरेखा तेलंगाना कैबिनेट से बर्खास्त

पहले से जारी चर्चा अब पूरी तरह सच साबित हुई

पहल से ही जारी थी तनातनी

उनकी पुत्री ने रेवंत के खिलाफ बोला था

पार्टी अनुशासन के दायरे से बाहर निकली

राष्ट्रीय खबर

हैदराबाध बंदोबस्ती और वन मंत्री कोंडा सुरेखा को गुरुवार को राज्य कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया गया है।  मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंत्री कोंडा सुरेखा को तत्काल प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया है। इस संबंध में राज्यपाल को औपचारिक सिफारिश पहले ही भेजी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने तेलंगाना योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से डॉ. जी. चिन्ना रेड्डी की नियुक्ति को भी तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है। डॉ. जी. चिन्ना रेड्डी के स्थान पर गडवाल विजयालक्ष्मी को तेलंगाना योजना बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने हैदराबाद में तेलंगाना राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में नेरेल्ला शारदा की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने काकतीय शहरी विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष के रूप में पूर्व राज्यसभा सांसद जी. सुधा रानी की नियुक्ति को भी अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

इससे पहले नई दिल्ली में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद तेलंगाना की मंत्री कोंडा सुरेखा ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपनी बेटी सुष्मिता की टिप्पणियों के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराए जाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई। श्रीमती सुरेखा ने बताया कि उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष अपना पक्ष रख दिया है और कैबिनेट में बने रहने की अनुमति मांगी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बेटी एक शादीशुदा और स्वतंत्र महिला है तथा उसकी टिप्पणियों के लिए सुरेखा को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दिल्ली में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को अपनी पूरी बात बता दी है और पार्टी नेताओं ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

श्रीमती सुरेखा ने कहा कि वे न तो अपनी बेटी के बयानों का समर्थन करती हैं और न ही उसकी निंदा करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने खुद के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज नोटिस) जारी करने को एक गलती करार दिया। उन्होंने बताया कि वे मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और एआईसीसी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल को लिखित स्पष्टीकरण सौंप चुकी हैं।

सुरेखा ने अन्य नेताओं के खिलाफ शिकायतों से निपटने के तरीके पर भी पार्टी नेतृत्व को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के उस बयान पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिसमें उन्होंने 10 साल तक मुख्यमंत्री रहने की बात कही थी। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी टिप्पणियां अनुशासनहीनता के दायरे में नहीं आतीं? उन्होंने मांग की कि उनके खिलाफ कोई कदम उठाने से पहले मुख्यमंत्री पर कार्रवाई की जानी चाहिए।