अफ्रीका में अपनी ताकत दिखाई चीन की सेना ने
बीजिंगः चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अपनी वैश्विक वायु शक्ति का अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए नाटो देशों की सीमाओं के ठीक पास और उत्तरी अफ्रीका में एक साथ प्रमुख सैन्य गतिविधियों को अंजाम दिया है। इस रणनीतिक कदम के तहत चीन ने अपने जेड-20के मध्यम उपयोगिता हेलीकॉप्टरों को बेलारूस में तैनात किया है, जबकि दूसरी ओर अपने भारी-भरकम जे-16 लड़ाकू विमानों को 6,000 किलोमीटर दूर मिस्र भेजकर एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास पूरा किया है। ये दोनों घटनाक्रम यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि चीन अपनी पारंपरिक सीमाओं से बहुत दूर तक अपनी सैन्य उपस्थिति और त्वरित हवाई परिचालन क्षमता का विस्तार कर रहा है।
नाटो की पूर्वी सीमाओं—पोलैंड, लिथुआनिया और लातविया—के ठीक सामने बेलारूस में आयोजित स्विफ्ट ईगल 2026 संयुक्त अभ्यास के दौरान चीनी वायु सेना ने अपने उन्नत हेलीकॉप्टर उतारे। जानकारी के मुताबिक 16 सीट वाले इस आधुनिक हेलीकॉप्टर में विशेष सर्चलाइट और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर लगे हैं, जो इसे जटिल शहरी इलाकों में सामरिक हवाई हमलों और रेकी ऑपरेशनों के लिए बेहद घातक बनाते हैं। अभ्यास के दौरान चीनी और बेलारूसी सैनिकों ने हेलीकॉप्टर से फास्ट-रोप और रैपलिंग का उपयोग कर शहरी आतंकवाद-रोधी अभियानों और खोज-बचाव परिदृश्यों का यथार्थवादी अभ्यास किया, जिससे नाटो देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
वहीं दूसरी ओर, चीन ने उत्तरी अफ्रीका में ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन 2026 अभ्यास के तहत कम से कम छह जे-16 फाइटर जेट्स को मिस्र तक सफलतापूर्वक तैनात किया। इस 6,000 किलोमीटर लंबी अंतरमहाद्वीपीय उड़ान को सक्षम बनाने के लिए हवाई ईंधन टैंकर का उपयोग किया गया, जिसने न केवल हवा में ईंधन की आपूर्ति की बल्कि दो महाद्वीपों और चार देशों के हवाई क्षेत्रों को पार करने के दौरान एक एयरबोर्न कमांड सेंटर के रूप में भी काम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि जे-16 चीन का अब तक का सबसे सक्षम फाइटर जेट है जिसे विदेशों में अभ्यास के लिए भेजा गया है।
चीन का जे-16 फाइटर जेट एक विशाल और अत्यंत उन्नत रडार प्रणाली से लैस है, जो मिस्र के पास वर्तमान में मौजूद एफ-16, मिग-29 और राफेल जेट्स के रडार की तुलना में लगभग चार गुना बड़ा है। इससे मिस्र के पायलटों को अत्याधुनिक चीनी सैन्य तकनीक को समझने और उसके साथ एकीकृत संचालन का दुर्लभ अवसर मिला है। चीनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह दोहरा ऑपरेशन लंबी दूरी की सैन्य तैनाती, त्वरित लामबंदी और एकीकृत अंतर-महाद्वीपीय अभियानों को अंजाम देने की उनकी क्षमता का एक बड़ा और सफल परीक्षण था।