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ईरान अब मृत और असफल राष्ट्रः डोनाल्ड ट्रंप

दोनों तरफ के परस्पर विरोधी हमलों के बीच नया बयान

वाशिंगटनः मध्य पूर्व में अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच लगभग एक महीने के ठहराव के बाद सीधी सैन्य भिड़ंत फिर से शुरू हो गई है। इस नए सैन्य तनाव और हमले के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को औपचारिक रूप से एक असफल राष्ट्र करार दिया और सोशल मीडिया पर एक आक्रामक बयान में लिखा कि यह देश अब मृत हो चुका है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान की सैन्य क्षमता, आर्थिक स्थिति और उसके शीर्ष नेतृत्व की आलोचना करते हुए कई व्यापक और गंभीर दावे किए हैं।

अपने ट्रुथ सोशल मंच पर पोस्ट करते हुए ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान अपनी सैन्य और प्रशासनिक शक्ति पूरी तरह खो चुका है। उन्होंने लिखा, उनके पास कोई नौसेना नहीं बची है, कोई वायु सेना नहीं है, उनकी अपनी कोई मुद्रा नहीं है, वे अपने सैनिकों और पुलिस कर्मियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं, देश में मुद्रास्फीति 300 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, और उनका नेतृत्व पूरी तरह से अव्यवस्थित है व देश का प्रतिनिधित्व करने में पूरी तरह असमर्थ है। ट्रम्प ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान केवल अमेरिकी मीडिया की फेक न्यूज के सहारे टिका है और दावा किया कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 100,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया है। उन्होंने कहा कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर मानवता के खिलाफ युद्ध अपराध का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

ट्रम्प का यह तीखा बयान उस समय आया जब ईरान ने हॉरमुज जलडमरूमध्य में स्थित अपने रणनीतिक लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के जवाब में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए। इससे पहले, अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर मौजूद ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाकर कार्रवाई की थी। अमेरिकी रक्षा विभाग की सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया कि उनकी सेनाओं ने हॉरमुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक खदानें बिछाने की तैयारी कर रहे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बलों के खिलाफ सीमित और सटीक कार्रवाई की है, जो समुद्री मार्गों के लिए आसन्न खतरा पैदा कर रहे थे।

अमेरिका का कहना है कि इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में ईरानी नौसेना को बारूदी सुरंगें बिछाने से रोकना था। हॉरमुज जलडमरूमध्य इस पूरे संघर्ष का केंद्रीय बिंदु बना हुआ है, जहां ईरान वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को बाधित करने का प्रयास कर रहा है, वहीं अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी का मुकाबला कर रही है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसद  हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता था।