अमेरिकी जेवलिन मिसाइल के बाद रूस का नया प्रस्ताव
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान काफी सफल
पांच और स्क्वाड्रन का यह प्रस्ताव है
भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः रूस ने भारतीय वायु सेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने और देश की वायु रक्षा क्षमताओं को अत्यधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा जारी निविदा के उत्तर में रक्षा मंत्रालय के समक्ष एक विस्तृत आधिकारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। यह प्रस्ताव भारतीय वायु सेना के लिए शक्तिशाली एस-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों के पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन के अधिग्रहण से संबंधित है।
हाल ही में आयोजित रणनीतिक सैन्य अभियानों, विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ने अपनी अद्वितीय प्रभावशीलता, तीव्र प्रतिक्रिया क्षमता और अचूक सटीकता का लोहा मनवाया था। इस परिचालन सफलता ने भारतीय रक्षा क्षेत्र में इस उन्नत मिसाइल प्रणाली की अपरिहार्यता और वैश्विक स्तर पर इसकी उच्च दक्षता को पुन: रेखांकित किया है।
प्रारंभिक रक्षा समीक्षाओं और निविदा विवरणों के अनुसार, पांच नए एस-400 स्क्वाड्रनों को शामिल करने की इस महत्वाकांक्षी और रणनीतिक परियोजना की कुल अनुमानित लागत 50,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह समझौता संपन्न होता है, तो यह भारत-रूस रक्षा संबंधों और भारत की दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों में एक नया और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।
उल्लेखनीय है कि भारत ने वर्ष 2018 में हस्ताक्षरित 5 अरब डॉलर के पहले सौदे के तहत कुल पांच एस-400 स्क्वाड्रनों का ऑर्डर दिया था, जिनमें से चार स्क्वाड्रन भारत को पहले ही प्राप्त हो चुके हैं और वे रणनीतिक सीमाओं पर पहले से ही तैनात हैं। पांचवें और अंतिम स्क्वाड्रन की आपूर्ति भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रगति पर है। नया प्रस्ताव भारत की लगातार बदलती सीमाओं की सुरक्षा और हवाई खतरों के त्वरित जवाब के लिए पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रनों को वायु सेना के बेड़े में शामिल करने के लिए पेश किया गया है, ताकि देश की संपूर्ण हवाई सीमाओं पर एक अभेद्य रक्षा कवच स्थापित किया जा सके।