अब तक 157 की मौत, हजारों लापता
काठमांडूः नेपाल और चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत की सीमा पर बुधवार को आए एक विनाशकारी फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) ने व्यापक तबाही मचाई है। इस भीषण आपदा में अब तक कम से कम 157 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य लापता हैं। लापता लोगों में 47 अमेरिकी और कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए 133 भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
नेपाली अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र से लगभग 341 विदेशी नागरिक लापता हैं। इनमें भारत और अमेरिका के अलावा कम से कम 90 इटली, 9 दक्षिण कोरिया, 4 रूस, 2 पुर्तगाल, 1-2 यूक्रेन तथा 34 ऑस्ट्रेलिया के नागरिक शामिल हैं। चीन ने अपने क्षेत्र में 3 लोगों की मौत और करीब 200 लोगों के लापता होने की सूचना दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कीचड़ और पानी के विशाल सैलाब को लोगों, कारों, बसों, इमारतों और पुलों को अपने बहाव में लीलते हुए देखा गया है।
नेपाली सेना ने युद्ध स्तर पर राहत अभियान चला रखा है। 12 हेलीकॉप्टरों की मदद से 114 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। आपदा क्षेत्र में एक अस्थायी अस्पताल स्थापित किया गया है और 25 गंभीर घायलों को काठमांडू एयरलिफ्ट किया गया है। नेपाल पुलिस की चार चौकियों का स्टाफ और सीमा शुल्क अधिकारी भी लापता हैं।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घोषणा की कि भारत नेपाल को 22,000 पाउंड राहत सामग्री और दवाएं भेज रहा है। इसके अलावा, आईएफआरसी ने 12 लाख डॉलर की आपातकालीन निधि तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आपातकालीन चिकित्सा सामग्री व तंबू भेजे हैं।
वैज्ञानिकों और अधिकारियों के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आए एक शक्तिशाली भूस्खलन और ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के कारण यह जलप्रलय आया। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भूस्खलन के कारण 5.2 तीव्रता का झटका दर्ज किया। बाढ़ के कारण 19 मोटर पुल और 25 मील सड़कें बह गई हैं, तथा कई जगहों पर 5 फीट से अधिक गहरा कीचड़ जमा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्थानीय अधिकारियों को खोज अभियान तेज करने का आदेश दिया है।