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साइबर अपराध से जुड़े करीब 3 लाख यूआरएल हटाने की सिफारिश

गृह मंत्रालय ने पूरे देश में नया अभियान प्रारंभ किया

शिकायत के लिए अलग केंद्र स्थापित

गड़बड़ी में लिप्त पाये गये लिंक चिह्नित

साइबर क्राइम में शामिल होने पर कार्रवाई

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: सरकारी आंकड़ों के हवाले से अधिकारियों ने बताया कि मार्च और जुलाई 2026 के बीच गैर-कानूनी या हानिकारक सामग्री वाले लगभग 3 लाख (2.98 लाख) यूआरएल को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को भेजा गया। इनमें से लगभग 82 प्रतिशत (2.44 लाख) नोटिस राज्य प्राधिकारियों द्वारा जारी किए गए थे। गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने साइबर धोखाधड़ी, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और स्टॉक-निवेश घोटालों से जुड़े लगभग 51,000 यूआरएल को अलग से चिन्हित किया। गृह मंत्रालय के साइबर विंग द्वारा किए गए दो साल के विश्लेषण में पाया गया कि ऑनलाइन प्रसारित होने वाली अवैध सामग्री में मुख्य रूप से वित्तीय धोखाधड़ी, बाल यौन शोषण सामग्री और महिलाओं एवं बच्चों को लक्षित करने वाले अपराध शामिल हैं।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि फरवरी 2026 में सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन के बाद, मध्यस्थों के लिए ऐसी सामग्री को हटाने की समय सीमा को 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया गया है। इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने सहयोग पोर्टल विकसित किया है जो अधिकृत एजेंसियों द्वारा इंटरनेट मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को स्वचालित और तेज बनाता है।

अधिकारियों ने मेवाड़, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी जैसे साइबर अपराध हॉटस्पॉट्स की पहचान की है, जहां समन्वय के लिए 7 संयुक्त साइबर समन्वय टीमें गठित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के लिए I4सी ने साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर की स्थापना की है, जिसमें बैंक, दूरसंचार और कानून प्रवर्तन एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। गृह मंत्रालय ने नागरिकों से हेल्पलाइन नंबर 1930 पर साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने की अपील की है।