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नई पीढ़ी ने देश को साहस दिलाया हैःशीतल पी सिंह

भारत में लोकतंत्र को यूं ही नहीं डिगाया जा सकता

जेन जी ने बदलाव की नींव रखी है

ईवीएम से वोटर लिस्ट ज्यादा जरूरी

विरोधी दल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः देश के वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने कहा कि देश में लोकतंत्र की जड़ें उम्मीद से अधिक मजबूत है। इसकी खास वजह हमारा संविधान है, जिसके प्रारंभ में ही लिखा है, हम भारत के लोग। इससे पहले भी आपातकाल के दौरान देश को झटका लगा था लेकिन बाद में देश में फिर से लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल हो गयी। वर्तमान में भी अस्थिरता का माहौल है पर संविधान के ढांचे के भीतर इसे पूरी तरह ध्वस्त करना संभव नहीं है। श्री सिंह आज पुरुलिया रोड स्थित एसडीसी सभागार में स्थानीय पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। वह यहां पीयूसीएल द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में भाग लेने आये थे। यह गोष्ठी स्वर्गीय फादर स्टेन स्वामी की याद में आयोजित किया गया था। यह गोष्ठी लोकतंत्र का भविष्य, छात्र युवा आंदोलन से उभरती संभावना और मीडिया की भूमिका पर आयोजित की गयी थी।

उन्होंने नई पीढ़ी यानी जेन जी की इस बात के लिए तारीफ की कि इस युवा पीढ़ी ने देश के अंदर व्याप्त भय के माहौल को भी खत्म कर दिया है। कई कारणों से लोग गलतियों का विरोध करने से डरते थे। युवा पीढ़ी ने इस माहौल को बदल दिया है और अब लोग खुलकर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं और सत्ता से सवाल भी कर रहे हैं। लोकतंत्र के लिए यह एक शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि एकबार ऐसे बदलाव की धारा आगे बढ़ती है तो अंततः वह मंजिल तक पहुंच ही जाती है। इसलिए अलग अलग खंडों में होने वाले तमाम ऐसे आंदोलनों को समूह में देखने की जरूरत है।

बात चीत में उन्होंने कहा कि पूरे देश को ईवीएम के बदले वोट काटने की साजिशों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। किस विधानसभा सीट पर जीत और हार का अंतर देखकर वोटर लिस्ट में बदलाव एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है। इसके अलावा वर्तमान में चुनाव आयोग की मेहरबानी से ऐसे वोटरों की एक फौज खड़ी हो गयी है तो सभी राज्यों में जाकर वोट डालते हैं। चुनाव के ठीक पहले बीएलओ को अलग से एक सूची देकर वैसे मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने का निर्देश दिया जाता है। इन घटनाओं पर दूसरे राजनीतिक दल क्यों ध्यान नहीं दे रहे हैं, यह अपने आप में हैरानी की बात है। मीडिया के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा कुछ कहने की अब जरूरत नहीं रह गयी है। सारा देश इस सच को अच्छी तरह समझ चुका है। लेकिन अच्छी बात यह है कि एजेंडा परोसने की चालें अब जनता पर असर नहीं डाल पा रही है।