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ज्यादा तनावमुक्त रहना भी खतरे की घंटी है खुद में, देखें वीडियो

तनाव वाले हार्मोन दिमाग की मरम्मत करते हैं

खास प्रकार की कोशिकाएं सक्रिय

एक परत बनाकर ढाल बनती जाती है

सिर्फ तीन दिनों तक यह सक्रिय रहता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध में मस्तिष्क की मरम्मत और विकास से जुड़ी एक बड़ी जानकारी सामने आई है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री के शोधकर्ताओं, जान ड्यूसिंग और क्लेमेंस रीस ने पाया कि मस्तिष्क में चोट लगने पर एक विशेष प्रकार की कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं, जिन्हें ऑलिगोडेंड्रोसाइट प्रोजेनिटर सेल्स कहा जाता है।

मस्तिष्क की मरम्मत की प्रक्रिया ये ओपीसी ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स में विकसित हो सकते हैं, जो मायलिन शीथ का निर्माण करते हैं। मायलिन एक सुरक्षात्मक परत है जो तंत्रिका कोशिकाओं के एक्सोन को ढंकती है और उनके बीच प्रभावी संचार सुनिश्चित करती है। मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी बीमारियों या चोटों में जब यह परत क्षतिग्रस्त होती है, तो न्यूरॉन्स को नुकसान पहुँचता है। शोध से पता चला कि चोट के बाद ये ओपीसी घाव के आसपास तेजी से बढ़ते हैं और नई मायलिन परत बनाकर क्षति की भरपाई करने में मदद करते हैं।

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शोध का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि चोट लगने के बाद लगभग एक-तिहाई ओपीसी कॉर्टिकोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन (सीआरएच) का उत्पादन करते हैं। सामान्यतः यह हार्मोन शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है, लेकिन यहाँ यह चोट के शुरुआती चरणों में उपचार की प्रक्रिया को तेज करने का काम करता है। अध्ययन के अनुसार, सीआरएच का यह उत्पादन चोट के कुछ घंटों के भीतर शुरू हो जाता है और तीन दिनों के भीतर बंद हो जाता है। यह समयबद्ध सक्रियता मायलिन की मरम्मत के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सीआरएच रिसेप्टर-1 के माध्यम से ये कोशिकाएं मायलिन के पुनर्गठन को नियंत्रित करती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ाव यह प्रणाली केवल चोट ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मस्तिष्क के सामान्य विकास में भी मायलिन बनाने का काम करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बचपन में अत्यधिक तनाव का मानसिक विकारों से गहरा संबंध है। यदि भविष्य के शोध इस कड़ी को पुख्ता करते हैं, तो अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए नई चिकित्सीय पद्धतियां विकसित की जा सकती हैं, जो सीधे तौर पर ओपीसी और सीआरएच प्रणाली को लक्षित करेंगी। यह खोज मस्तिष्क की स्वयं को ठीक करने की क्षमता को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

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