नारनौंद में सफाई कर्मचारियों और प्रशासन में टकराव: प्राइवेट लोगों से सफाई करवाने पर हंगामा, हड़तालियों ने रुकवाया काम
नारनौंद / हिसार (हरियाणा): नारनौंद शहर में कूड़ा उठाने और चरमराती सफाई व्यवस्था को लेकर नगर पालिका के हड़ताली कर्मचारियों तथा स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
अपनी 17 सूत्रीय न्यायोचित मांगों के समर्थन में गत 6 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे नगर पालिका के सफाई कर्मियों और अग्निशमन (फायर) विभाग के कर्मचारियों ने प्रशासन द्वारा निजी (प्राइवेट) व्यक्तियों से शहर में सफाई करवाने के प्रयास का पुरजोर विरोध किया है। कर्मचारियों के कड़े रुख के चलते शहर में कूड़ा उठाने की व्यवस्था को लेकर गतिरोध और गहरा गया है।
🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस के सम्मान में दी गई छूट, समारोह स्थल पर सफाई की अनुमति
कर्मचारी यूनियन के प्रमुख नेता जसबीर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी हड़ताल पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त तक घोषित है।
किंतु देश के गौरव और राष्ट्रीय पर्व का सर्वोच्च सम्मान करते हुए हड़ताली कर्मचारियों ने स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह स्थल की विशेष सफाई करने की पूरी छूट दी है, ताकि राष्ट्रीय पर्व बिना किसी व्यवधान के गरिमा और धूमधाम से मनाया जा सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उत्सव से उन्हें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन उनके अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।
⚡ प्रशासन पर जानबूझकर टकराव पैदा करने का आरोप, कर्मचारियों ने रुकवाया काम
कर्मचारी नेता ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन संवाद स्थापित करने के बजाय जानबूझकर हड़ताली कर्मचारियों के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न करना चाहता है।
इसी मंशा के तहत प्रशासन ने प्राइवेट श्रमिकों को बुलाकर शहर के विभिन्न वार्डों में सफाई का कार्य शुरू करवाया था, जिसकी सूचना मिलते ही हड़ताली कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर काम को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया। कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक उनकी आधिकारिक हड़ताल जारी रहेगी, वे शहर में किसी अन्य बाहरी व्यक्ति से सफाई का कार्य कदापि नहीं होने देंगे।
📜 17 सूत्रीय मांगों पर सरकार की वादाखिलाफी से आक्रोश, पत्र जारी न होने पर रोष
यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि वे अपनी 17 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
पूर्व में हुई वार्ताओं के दौरान सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति व्यक्त की थी, किंतु महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक कोई आधिकारिक शासनादेश या पत्र जारी नहीं किया गया। सरकार की इसी वादाखिलाफी और टालमटोल की नीति के चलते कर्मचारियों को मजबूर होकर हड़ताल का कड़ा रास्ता अख्तियार करना पड़ा है।
⚖️ जबरदस्ती की तो देंगे मुंहतोड़ जवाब, जेल जाने को भी तैयार: कर्मचारी संघ
हड़ताली कर्मचारियों ने प्रशासन को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि यदि उनके लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने या जबरदस्ती करने का प्रयास किया गया, तो इसका संगठित होकर मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वे अपने हक और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह कटिबद्ध हैं और इसके लिए यदि उन्हें जेल भी जाना पड़े, तो वे पीछे नहीं हटेंगे। यदि सरकार ने शीघ्र अधिसूचना जारी नहीं की, तो यह हड़ताल 15 अगस्त के उपरांत अनिश्चितकाल के लिए और आगे बढ़ाई जा सकती है।