झारखंड जेपीएससी पेपर लीक में बड़ा खुलासा: सरगना अभय तिवारी ने बताई नौकरियों की रेट लिस्ट, JPSC अध्यक्ष तक पहुंची आंच
रांची (झारखंड): झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जारी भारी बवाल के बीच पेपर लीक कांड के मुख्य सूत्रधार अभय तिवारी ने CID की पूछताछ में अत्यंत चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
पूछताछ के दौरान अभय ने राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए तय ‘रेट लिस्ट’ की जानकारी दी है। अभय के कथनानुसार, जेपीएससी (JPSC मुख्य परीक्षा) के लिए प्रति अभ्यर्थी ₹70 लाख में सौदा तय किया जाता था। इसी प्रकार, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर्स (FRO) पद के लिए ₹20 से ₹25 लाख तथा असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) पद हेतु ₹30 से ₹35 लाख का रेट निर्धारित था। परीक्षा से पूर्व ही अभ्यर्थियों से एडवांस टोकन मनी ली गई थी, जिसमें से लगभग ₹1 करोड़ अभय को टोकन मनी के रूप में प्राप्त हुए थे। सीआईडी (CID) अब इसी बयान को आधार मानकर जांच की कड़ियां जोड़ रही है।
🕵️ SSC CGL में रैंक-2 लाने वाला अभय कैसे आया रडार पर? TDPL कंपनी और ₹5 लाख नकद से खुला राज
एसएससी सीजीएल (SSC CGL) में द्वितीय स्थान (रैंक-2) प्राप्त करने वाले अभय तिवारी से प्रारंभ हुई यह जांच अब एक बहुत बड़े परीक्षा सिंडिकेट तक पहुंचती दिख रही है।
अभय तिवारी ‘टीडीपीएल’ (TDPL) नामक कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था। उल्लेखनीय है कि यही कंपनी जेपीएससी (JPSC) की परीक्षाओं के आयोजन से संबद्ध थी। अभय की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अप्रत्याशित सफलता ने सीआईडी के सामने यह यक्ष प्रश्न खड़ा किया कि क्या यह केवल एक संयोग था अथवा परीक्षा तंत्र के भीतर उसकी गहरी पहुंच थी। सीआईडी की छापेमारी में अभय के ठिकाने से ₹5 लाख नकद जब्त किए जाने के पश्चात उसे गिरफ्तार कर लिया गया। तत्पश्चात पुलिस अभय के सहयोगियों—अरविंद कुमार, जेपीएससी कर्मचारी सोनू कुमार और टीडीपीएल के अन्य अधिकारियों तक पहुंची।
🏨 रांची के होटल कनेक्शन और ₹2 करोड़ की रिश्वत के आरोप से गई जेपीएससी अध्यक्ष की कुर्सी
जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए रांची के स्टेशन रोड स्थित एक प्रमुख होटल का कनेक्शन भी उजागर हुआ है, जिसे अभय ने 11 महीनों के लिए लीज पर लिया था।
सीआईडी फिलहाल होटल के गेस्ट रजिस्टर, बिल और वहां आने-जाने वाले संदिग्धों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। इसके साथ ही, अभय के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल जारी है। जांच का एक सिरा जेपीएससी और टीडीपीएल के कथित अवैध साठगांठ तक जा पहुंचा। टीडीपीएल को जेपीएससी की परीक्षा का काम दिलाने के एवज में ₹2 करोड़ के लेन-देन के आरोप सामने आए। इन गंभीर आरोपों के बाद तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते को अपने पद से हाथ धोना पड़ा और बाद में उनकी गिरफ्तारी भी हुई।
💼 इंटरव्यू के लिए ₹15 लाख फिक्स, FRO और ACF नेटवर्क से जुटाए गए ₹5.80 करोड़
जांच में जेपीएससी साक्षात्कार (Interview) में कथित सेटिंग का कोण भी उभरकर आया है।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों से केवल इंटरव्यू में अंक दिलाने के लिए प्रति उम्मीदवार ₹15 लाख तक वसूलने की बात सामने आई है। यही खेल सीडीपीओ (CDPO), एफआरओ (FRO) और एसीएफ (ACF) की परीक्षाओं में भी दोहराया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 12 एफआरओ और 8 एसीएफ (कुल 20 अभ्यर्थियों) के नेटवर्क में से 19 अभ्यर्थियों को सफल कराया गया। इस पूरे कथित नेटवर्क के माध्यम से लगभग ₹5.80 करोड़ की कुल वसूली की गई थी, जिसमें से ₹1 करोड़ की राशि अकेले अभय ने अपने पास रखी थी।
🗣️ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बड़ा हमला: ‘यूपी की टीडीपीएल कंपनी ने मचाई लूट, किसी को नहीं बख्शेंगे’
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “उत्तर प्रदेश की एक कंपनी ने यहां आकर परीक्षाओं में लूट मचाई है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।” दरअसल, मुख्यमंत्री के निशाने पर लखनऊ मुख्यालय वाली ‘टीडीपीएल’ (TDPL) कंपनी है, जो वर्ष 2010 में स्थापित हुई थी और जिसके पास झारखंड में परीक्षा आयोजन का ठेका था। सीआईडी अब अभ्यर्थी, परीक्षा एजेंसी और आयोग के अधिकारियों के त्रिकोण को जोड़कर इस पूरे महाघोटाले का पर्दाफाश करने में जुटी है।