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सस्ता माल खरीदने के चक्कर में फंस गयी ब्रिटिश सेना

नौसेना के ड्रोनों में चीनी कैमरे का राज खुला

  • के 3 स्काउट यूएवी में लगाये गये हैं

  • चीन तक नियमित संकेत भेजता है

  • पता चलने के बाद सुधार जारी है

एजेंसियां

लंदनः ब्रिटिश रॉयल नौसेना के मानवरहित निगरानी ड्रोनों में लगाए गए कैमरों द्वारा चीन के एक सिस्टम को रूटीन हार्टबीट सिग्नल भेजने का मामला सामने आने के बाद सैन्य उपकरणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी तरह का संवेदनशील डेटा लीक नहीं हुआ है, लेकिन इस खुलासे ने पश्चिमी देशों में हड़कंप मचा दिया है।

यह कैमरे नौसेना के के3 स्काउट मानवरहित नौकाओं में फिट किए गए हैं, जिनका उपयोग रॉयल नौसेना अपने बेड़े में स्वायत्त प्रणालियों के विस्तार के लिए कर रही है। एक सुरक्षा मूल्यांकन के दौरान इन कैमरों द्वारा चीन के एक डिवाइस को सिग्नल प्रेषित किए जाने का पता चला। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कम्युनिकेशंस में केवल यह पुष्टि करने वाली बुनियादी जानकारी शामिल थी कि कैमरे ऑनलाइन हैं और सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

इसके बावजूद, इस खोज ने सैन्य ड्रोनों में उपयोग किए जाने वाले घटकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है, विशेषकर उन उपकरणों के संदर्भ में जिनका निर्माण या आपूर्ति थर्ड-पार्टी कंपनियों के माध्यम से की जाती है। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि ये ट्रांसमिशन के3 स्काउट ड्रोनों के रूटीन साइबर वल्नरेबिलिटी असेसमेंट के दौरान खोजे गए थे।

प्रवक्ता ने कहा कि एक गहन जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि मंत्रालय के किसी भी डेटा या सिस्टम तक न तो पहुंच बनाई गई है और न ही कोई डेटा से बाहर भेजा गया है। हमारी परीक्षण प्रक्रियाएं संभावित कमजोरियों की पहचान करने के लिए डिजाइन की गई हैं ताकि समय रहते उनका समाधान किया जा सके।

के3 स्काउट का निर्माण फेरेहम, इंग्लैंड स्थित ब्रिटिश रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी क्रैकेन टेक्नोलॉजी ग्रुप द्वारा किया जाता है। हालांकि, कैमरे एक अन्य थर्ड-पार्टी निर्माता द्वारा आपूर्ति किए गए थे, जिसने सुरक्षा को लेकर आश्वासन दिया था। रॉयल नौसेना ने ऑपरेशन बीहाइव के तहत ऐसी 20 नौकाएं खरीदी हैं, जिसका उद्देश्य मानवरहित तकनीक का दायरा बढ़ाना है।

यह नौकाएं निगरानी, बल सुरक्षा और सटीक-स्ट्राइक अभियानों सहित कई मिशनों के लिए डिजाइन की गई हैं। यह घटना इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले समय में ब्रिटिश सैन्य अभियानों में ड्रोनों की भूमिका बेहद अहम होने की उम्मीद है। मई में, रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की थी कि के3 ड्रोन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित तैनाती का हिस्सा बन सकते हैं, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा करना है।

इस बीच, रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा कि यह ब्रिटिश योगदान अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एक मजबूत और विश्वसनीय रक्षात्मक क्षमता प्रदान करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से सैन्य आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा को लेकर आने वाले दिनों में और कड़े नियम बनाए जा सकते हैं।