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हंगामा के बाद भी अमित शाह अब भी सदन से गायब

तीन मिनट में लोकसभा में तीन विधेयक पारित हो गये

किरेण रिजिजू को जिम्मेदारी दी गयी थी

परिसर में आने के बाद भी सदन में नहीं

विपक्ष उनसे बार बार सीधा जवाब मांग रहा है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय संसद बिना किसी विचार-विमर्श और महज कुछ ही मिनटों में कानून पारित करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आती जा रही है। सरकार का हमेशा यही स्पष्टीकरण होता है कि विपक्ष ने कार्यवाही में बाधा डाली है।

मौजूदा मानसून सत्र के दौरान भी लोकसभा अब तक सात विधेयक पारित कर चुकी है, जिनमें से पांच बिना किसी चर्चा के पास हुए हैं। विपक्ष की यह वाजिब मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आएं और 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर बयान दें।

पिछले पांच वर्षों में ऐसा ही पैटर्न लगातार देखने को मिला है। सरकार मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक के मुद्दों पर चर्चा कराने से इनकार करती रही है और हंगामे की आड़ में बिजली की गति से विधेयक पारित करा लेती है।

राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने कुछ साल पहले सोशल मीडिया पर लिखा था कि सरकार ने संसद सत्र के शुरुआती 10 दिनों में औसतन सात मिनट से कम समय में 12 विधेयक जल्दबाजी में पास कर दिए। कानून पास करना है या पापड़ी चाट बनाना! यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। गुरुवार, 6 अगस्त को कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर दोपहर 2.11 बजे चर्चा शुरू हुई और 2.14 बजे तक उसे पारित घोषित कर दिया गया। संसदीय निगरानी संस्था माध्यम ने बताया कि विधेयक को नामंजूर करने का एक सांविधिक प्रस्ताव था, जिसे तुरंत खारिज कर दिया गया। सांसदों द्वारा लाए गए संशोधनों पर भी विचार नहीं किया गया।

एक दिन पहले, 5 अगस्त को बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 बिना किसी चर्चा के महज पांच मिनट में पारित कर दिया गया, जबकि इसके लिए तीन घंटे निर्धारित किए गए थे। पिछले दो हफ्तों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ही लोकसभा से अनुपस्थित रहे हैं। भले ही दोनों सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हों, लेकिन शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत Doval को लोकमान्य तिलक सम्मान देने के लिए 1 अगस्त को पुणे की यात्रा भी की थी।

यद्यपि शाह संसद भवन स्थित अपने कार्यालय से कामकाज संभाल रहे हैं, लेकिन वे लोकसभा में उपस्थित नहीं हुए हैं। इसके बजाय, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय सदन में गृह मंत्रालय से जुड़े कामकाज संभाल रहे हैं।

विपक्ष ने गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर कड़ा विरोध जताया है। उसका तर्क है कि चूंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्री के अधीन आती है, इसलिए उन्हें छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए संसद को स्पष्टीकरण देना चाहिए। संविधान के तहत सरकार लोकसभा के प्रति जवाबदेह है। फिर भी न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री सवालों के जवाब देने या दिल्ली पुलिस के कृत्यों की जिम्मेदारी लेने को तैयार दिख रहे हैं।