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मगरमच्छ के शिकार व्यक्ति का शव बरामद

बाढ़ ग्रस्त इलाके में तीन दिनों के अभियान के बाद कामयाबी

छतीशदेबला पंचायत की घटना है

गत 28 जुलाई को हमला हुआ था

घटना के बाद से दहशत का माहौल

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वरः ओडिशा के जाजपुर जिले में एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। खारस्रोटा नदी के किनारे मगरमच्छ के हमले में लापता हुए 52 वर्षीय हरिहर जेना का शव तीन दिनों की गहन खोजबीन के बाद अंततः मधुसूदनपुर घाट से बरामद कर लिया गया है। यह दुखद घटना जाजपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले छतीशदेबिला पंचायत के ऋषिपुर गांव में घटी, जिसने पूरे इलाके में मातम और भय का माहौल पैदा कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरिहर जेना 28 जुलाई की शाम को किसी काम से खारस्रोटा नदी के तट पर गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के मुताबिक, वे नदी के किनारे शांत बैठे हुए थे, तभी घात लगाए बैठे एक आदमखोर मगरमच्छ ने उन पर अचानक हमला कर दिया। हमला इतना तेज और आकस्मिक था कि हरिहर जेना को संभलने का मौका तक नहीं मिला और मगरमच्छ उन्हें खींचकर गहरे पानी के भीतर ले गया।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आ गया। स्थानीय फायर सर्विस की टीम और जिला प्रशासन ने मिलकर एक व्यापक खोज और बचाव अभियान चलाया। तीन दिनों तक चले कठिन संघर्ष और पानी में तलाशी के बाद, शनिवार को शव को मधुसूदनपुर घाट के समीप बरामद किया गया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

इस भयावह घटना के बाद से खारस्रोटा नदी के आसपास बसे गांवों के निवासियों में जबरदस्त दहशत का आलम है। लोग अब नदी के पास जाने से भी डर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब मगरमच्छ ने किसी को अपना शिकार बनाया है; पहले भी इस नदी में मगरमच्छ के हमलों की खबरें आती रही हैं।

विशेषज्ञों और वन विभाग का मानना है कि मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने के साथ मगरमच्छों की सक्रियता काफी अधिक बढ़ जाती है। वे अक्सर नदी के तटों के करीब आ जाते हैं, जो इंसानी बस्तियों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इस घटना के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र में चेतावनी जारी की है, जिसमें निवासियों को सलाह दी गई है कि वे जब तक मगरमच्छों का खतरा टल न जाए, तब तक नदी के किनारों पर जाने से बचें। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और बच्चों को नदी से दूर रखने की अपील की है।