संसद के मॉनसून सत्र में सरकार की तरफ से जानकारी दी गयी
खीरे की खेती के लिए मिले थे पैसे
सदन में रकम वापसी की जानकारी दी
इसमें हितों के टकराव का प्रावधान नहीं
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः अपने ही खेत में खीरे की खेती के लिए अपने ही मंत्रालय से 99 लाख रुपये की सब्सिडी लेने के मामले में विवादों में घिरे केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने वह राशि वापस लौटा दी है। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में इसकी जानकारी दी। हालाँकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में ऐसी किसी योजना के तहत सब्सिडी प्राप्त करने के लिए सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति के हितों के टकराव को रोकने के लिए कोई विशिष्ट नियम या प्रावधान मौजूद नहीं है।
यह सब्सिडी केंद्र सरकार द्वारा कैप्सिकम, खीरा, टमाटर, गुलाब, एंथुरियम और ऑर्किड जैसी विशिष्ट सब्जियों एवं फूलों की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए दी जाती है। इस योजना के तहत प्रति परिवार खेती की कुल लागत का 50 प्रतिशत तक (अधिकतम 1 करोड़ रुपये) अनुदान के रूप में दिया जाता है। इस योजना का संचालन कृषि मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा किया जाता है। राजस्थान के अजमेर से सांसद भागीरथ चौधरी स्वयं इस बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं।
भागीरथ चौधरी के पास खीरे की खेती के लिए 16,592 वर्ग मीटर का एक फार्म है। पिछले साल राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा मंजूर किए गए 467 फार्म सब्सिडी आवेदनों में मंत्री का फार्म भी शामिल था, जिस पर विपक्ष ने तीखे सवाल खड़े किए थे।
मंगलवार को लोकसभा में तृणमूल के सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस मुद्दे को दोबारा उठाते हुए पूछा कि क्या सरकारी पदों पर बैठे लोगों के मामलों में हितों के टकराव से बचने के लिए नियमों की समीक्षा करने की कोई योजना है। इसके लिखित जवाब में दूसरे कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि भागीरथ ने सब्सिडी की राशि संबंधित बैंक को लौटा दी है और बैंक को यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड को वापस भेजने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने यह भी बताया कि भागीरथ के अलावा राजस्थान के सिरोही से भाजपा सांसद लुंबाराम ने भी इस केंद्रीय योजना का वित्तीय लाभ लिया है। सरकार के अनुसार, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होती है जहाँ सभी पात्र आवेदकों को समान रूप से देखा जाता है।