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पूर्व आईएएस राकेश मेहता ने आत्महत्या कर ली

नोएडा के आवास पर शव के पास मिला सुसाइड नोट भी

काफी समय से बीमार चल रहे थे

शीला दीक्षित सरकार में काम किया

कई महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्यरत रहे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और 1975 बैच के वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी राकेश मेहता (74 वर्ष) ने उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित अपने निजी आवास पर खुदकुशी कर ली। इस दुखद घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है।

सुसाइड नोट में पूर्व मुख्य सचिव ने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के इस कठोर और अंतिम कदम के पीछे लंबे समय से चले आ रहे अपने खराब स्वास्थ्य और अत्यधिक मानसिक तनाव को मुख्य कारण बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर 6 सितंबर को उनके नोएडा स्थित घर में पाया गया था। आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं और पंचनामे के बाद रविवार को परिजनों एवं करीबी सहयोगियों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक संपन्न किया गया।

राकेश मेहता दिल्ली प्रशासनिक सेवा के बेहद सम्मानित और प्रभावी अधिकारियों में गिने जाते थे। अपने लंबे और बेदाग प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं। वे दिल्ली की पूर्व दिवंगत मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान दिल्ली नगर निगम के आयुक्त (कमिशनर) के पद पर कार्यरत रहे, जहाँ उन्होंने निगम के कामकाज में कई सुधारात्मक कदम उठाए।

इसके बाद, वर्ष 2007 में उन्हें दिल्ली के मुख्य सचिव का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया। तीन साल से अधिक समय तक दिल्ली के मुख्य सचिव पद पर रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल के दौरान दिल्ली में बिजली क्षेत्र के निजीकरण व सुधार, सार्वजनिक परिवहन (जैसे डीटीसी बस नेटवर्क का आधुनिकीकरण और मेट्रो का विस्तार) तथा कई फ्लाइओवर व नागरिक अवसंरचना (सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर) से जुड़ी प्रमुख विकास परियोजनाओं को सफलता पूर्वक धरातल पर उतारा गया।

इतना ही नहीं, वर्ष 2010 में दिल्ली में आयोजित हुए ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेल) की अवसंरचनात्मक तैयारियों और अंतर-विभागीय समन्वय का मुख्य जिम्मा भी उनके ही मुख्य सचिव रहते हुए पूरा किया गया था। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक दृढ़, कर्मठ और विज़नरी अधिकारी के रूप में याद किया जाता है।