Breaking News in Hindi

लावारिश हालत में मिले ओरंगुटान के पांच बच्चे

ओडिशा के घने जंगल में अचानक ग्रामीणों को नजर आया अजूबा

भारत में यह प्रजाति नहीं होती है

लावारिश हालत में घूम रहे थे बच्चे

इन सभी को रेसक्यू कर लिया गया है

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वरः ओडिशा के बालेश्वर जिले के भोगराई क्षेत्र स्थित बड़ापई गांव से सटे जंगल में मंगलवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी और कौतूहल का माहौल बन गया, जब स्थानीय ग्रामीणों ने पांच छोटे ओरंगुटान को लावारिस हालत में घूमते देखा। भारत के जंगलों में दुर्लभ और गैर-देशी जीव दिखने की यह खबर देखते ही देखते पूरे इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई। महज कुछ ही घंटों के भीतर घटनास्थल पर हजारों उत्सुक ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने और जानवरों की सुरक्षा के लिए स्थानीय वन विभाग की टीम को मोर्चा संभालना पड़ा।

वन विभाग के अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांचों नन्हें ओरंगुटानों को सुरक्षित रेस्क्यू कर अपने संरक्षण में ले लिया। बालेश्वर के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर प्रतीक प्रकाश इंदलकर ने बताया कि रेस्क्यू किए गए पांचों शावकों की लंबाई लगभग 1 से 1.5 फीट के बीच है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे बेहद छोटे यानी जुवेनाइल श्रेणी के हैं। इनमें से चार बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित रूप से भोजन व ओआरएस का घोल ले रहे हैं। पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम वन अधिकारियों की देखरेख में उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है।

यह पूरी घटना पर्यावरणविदों और प्रशासन के लिए एक बेहद गंभीर और चिंताजनक सवाल खड़ी करती है, क्योंकि भारत या ओडिशा का भौगोलिक वातावरण ओरंगुटान का प्राकृतिक आवास बिल्कुल नहीं है। मूल रूप से एशियाई ग्रेट एप्स की प्रजाति से ताल्लुक रखने वाले ये जीव पूरी दुनिया में केवल इंडोनेशिया और मलेशिया के बोर्नियो तथा सुमात्रा द्वीप के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में ही पाए जाते हैं। अत्यधिक शिकार और जंगलों की कटाई के कारण इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में इन्हें अति-संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।

सुमात्रा या बोर्नियो से ओडिशा के जंगलों तक किसी भी प्राकृतिक गलियारे के अभाव में इन जीवों का अपने आप यहां पहुंचना पूरी तरह से असंभव है। ऐसे में वन विभाग और राज्य सरकार को प्रबल आशंका है कि यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का कारनामा है। ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह खूंटिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि केंद्र सरकार की बहु-विषयक एजेंसी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और राज्य पुलिस के सहयोग से एक उच्चस्तरीय विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, यह पता लगाने के लिए कि क्या जंगल में कुछ और जानवर या तस्करी के कोई अन्य सबूत मौजूद हैं, वन विभाग ने आसपास के तटीय और वन क्षेत्रों में व्यापक कॉम्बिंग ऑपरेशन (सघन तलाशी अभियान) भी छेड़ दिया है।