धर्मेंद्र प्रधान के बाद कौन का सवाल अब संसद में तैर रहा
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पुलिस के आचरण की जिम्मेदारी
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दिल्ली पुलिस अमित शाह के अधीन
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छात्रों पर हमला का कौन जिम्मेदार
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों तथा युवाओं के उग्र प्रदर्शन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, अब विपक्षी दलों ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। एनडीए सरकार को घेरने की अपनी भावी रणनीति के तहत इंडिया गठबंधन ने अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया है। विपक्ष 20 जुलाई को आयोजित संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता, लाठीचार्ज और अमानवीय बल प्रयोग के मामले में गृह मंत्रालय की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के संसद भवन स्थित कक्ष में प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा और गृह मंत्री अमित शाह से इस विषय पर सदन में आधिकारिक वक्तव्य देने की मांग की जाएगी। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर जवाब नहीं देती, तब तक संसदीय कार्यवाही को सुचारू रूप से नहीं चलने दिया जाएगा।
सुरक्षा बलों द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अपनाए गए तरीकों, विशेषकर प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुए बर्बर हमले और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए गृह मंत्रालय से सीधे तौर पर जवाबदेही की मांग की थी। राहुल गांधी का यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत था कि विपक्ष इस मुद्दे को केवल शिक्षा मंत्रालय तक सीमित न रखकर सीधे गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व तक ले जाने की योजना बना रहा है।
विपक्षी दलों का तर्क है कि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्रों और नागरिकों पर हुए अत्यधिक बल प्रयोग की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी गृह मंत्री की बनती है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संसद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने आवश्यक और संयमित कदम उठाए थे। संसद के चल रहे सत्र में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस, नारेबाजी और बार-बार स्थगन के पूरे आसार बन गए हैं।