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संसद के बाहर काला पोशाक पहनकर विपक्ष का प्रदर्शन

नीट धांधली पर सरकार को घेरे हुए है विपक्ष

  • यह देश के लिए काला दिवस ही है

  • सभी घटक दलों के नेता मौजूद रहे

  • सरकार के रवैये की आलोचना की

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने बुधवार को संसद परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने इस दिन को काला दिवस के रूप में मनाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। काले कपड़ों में पहुंचे विपक्षी सांसदों ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जोरदार मांग की।

इस सिलसिलेवार प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव, राज्यसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसद महुआ माजी सहित कांग्रेस, सपा, वामपंथी दलों, राजद, टीएमसी और जेएमएम के दर्जनों सांसदों ने हिस्सा लिया।

यह प्रदर्शन पीएम आवास (लोक कल्याण मार्ग) के निकट राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने के ठीक एक दिन बाद हुआ है। संसद में उतरने से पूर्व राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के फ्लोर लीडर्स (दलीय नेताओं) की एक महत्वपूर्ण रणनीति बैठक भी हुई, जिसमें सरकार को घेरने की रूपरेखा तय की गई।

विरोध के प्रतीकात्मक महत्व को स्पष्ट करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, हम सब आज काले कपड़े पहनकर आए हैं। काला रंग जहां एक तरफ विरोध का प्रतीक है, वहीं यह देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ के दुख को भी दर्शाता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में छात्रों के साथ हुए व्यवहार, धर्मेंद्र प्रधान को पद पर बनाए रखने की जिद और छात्र असंतोष के प्रति सरकार के उदासीन रवैये के खिलाफ काले कपड़े पहनने का फैसला किया है। प्रदर्शन के दौरान मंच संभालते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार की आर्थिक और शैक्षणिक प्राथमिकताओं पर तीखा हमला बोला। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि देश का शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़  रुपये है, जबकि सरकार ने बड़े उद्योगपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि छात्र एक वास्तविक और जायज संघर्ष लड़ रहे हैं।